कौशाम्बी में मनरेगा की स्थिति खराब,मजदूरों को नही मिल रहा काम

कौशाम्बी

कौशाम्बी जिले में महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) पटरी से उतर गई है। श्रमिकों की मांग के बाद भी उनको काम नहीं मिल पा रहा है। इसका परिणाम रहा कि कौशांबी प्रदेश में न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। अधिकारियों ने इसे बेहद खराब स्थित करार दिया है। साथ ही सभी खंड विकास अधिकारियों को पत्र भेजकर चेतावनी दी है कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में प्रतिदिन कम-से-कम 50 श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया जाए।

कोरोना संक्रमण के दौरान मनरेगा ने ही देश की स्थित को मजबूत किया है। बाहर से लौटे श्रमिकों को गांव में ही काम मिला। इससे उनके सामने आर्थिक समस्या नहीं होने पाई। वर्तमान में यही योजना कर्मचारियों की लापरवाही से धड़ाम हो गई है। मांग के बाद भी श्रमिकों को काम नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में उच्च अधिकारियों ने नाराजगी जताते हुए खंड विकास कार्यालय स्तर पर तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों को चेतावनी दी है। स्पष्ट कहा है कि उनकी यह कार्यशैली शासनादेश के अनुरूप नहीं है। सरकार प्रत्येक ग्राम पंचायत में प्रतिदिन कम-से-कम 50 श्रमिकों को काम देना चाहती है। इसके अनुरूप कार्य किया जाए। प्रभारी उपायुक्त श्रम रोजगार लक्ष्मण प्रसाद ने बताया कि कर्मचारियों की लापरवाही के कारण कौशांबी प्रदेश में न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुका है। पांच दिसंबर तक 11357 श्रमिकों को रोजगार दिया गया है। जबकि प्रतिदिन कम से कम 22600 श्रमिकों को काम दिया जाना चाहिए। उन्होंने सभी खंड विकास अधिकारियों को पत्र भेजकर मनरेगा कार्यो में तेजी लाने का निर्देश दिया है।

Ashok Kesarwani- Editor
Author: Ashok Kesarwani- Editor