कौशाम्बी शोध संस्थान ने वेद-व्यास की जन्मस्थली पभोसा में की गोष्ठी,बोले पभोसा का अद्रिका द्वीप (औदर ) ही है महर्षि कृष्ण द्वैपायन की जन्मस्थली

कौशाम्बी:कौशाम्बी शोध संस्थान ने वेद-व्यास की जन्मस्थली पभोसा में की गोष्ठी,बोले पभोसा का अद्रिका द्वीप (औदर ) ही है महर्षि कृष्ण द्वैपायन की जन्मस्थली,

यूपी के कौशाम्बी जिले में महर्षि वेद व्यास या कृष्ण द्वैपायन का जन्म यमुना के अद्रिका द्वीप या औदर में हुआ था जोकि जनपद मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर यमुना तट पर स्थित प्रसिद्ध पभोसा पर्वत से सम्बन्धित है । इस विषय पर रविवार को पभोसा पर्वत के प्रान्तपद पर अवस्थित सिद्ध हनुमान मन्दिर परिसर में कौशाम्बी शोध संस्थान की संगोष्ठी सम्पन्न हुई।

महर्षि वेद-व्यास जन्मस्थान विषयक गोष्ठी का आयोजन श्री सिद्ध आथर्वन रिसर्च काउन्सिल और कौशाम्बी शोध संस्थान के तत्वावधान में किया गया, जिसमे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डाॅक्टर राजेन्द्र त्रिपाठी रसराज , श्री सिद्ध आथर्वण रिसर्च काउन्सिल के निदेशक डाॅक्टर भाष्कर मिश्र, परमानन्द पाण्डे , बीएचयू के रिसर्च स्कॉलर सर्वेश मिश्र , भुआल निर्मल, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के रिसर्च स्कॉलर विवेक त्रिपाठी , श्री सिद्ध आथर्वण रिसर्च काउन्सिल की पूजा पाण्डे ,  सुमित मिश्र, भूतनाथ संस्कृत माध्यमिक विद्यालय के आचार्य अनुज शुक्ल, डाॅक्टर बृजभूषण सिंह , स्थानीय अध्येता शान्तनु शुक्ल, पृथ्वीराज सिंह, सेवा निवृत्त उपनिदेशक सूचना दिनेश कुमार गर्ग, विशिष्ट विद्वान श्रीकृष्ण पाण्डे ने प्रतिभाग किया और वेद-व्यास की जन्म स्थली अद्रिका (औदर) पर होने को शास्त्रोक्त और प्रामाणिक बताया । विद्वानों ने कहा कि कालपी में जो वेद-व्यास के जन्मस्थल की बात कही जा रही है वह अप्रामाणिक और सन्दर्भ विहीन असत्य है ।

गोष्ठी में प्रभास गिरि स्थिति बहुला गाय मन्दिर के विद्वान महन्त स्व गौरीशंकर महाराज को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धासुमन अर्पित की गयी । सिद्ध हनुमान मन्दिर के महंत तपोमूर्ति उत्तम बाबा का गोष्ठी में अंगवस्त्र पहनाकर मुख्य वक्ता डाॅक्टर राजेन्द्र त्रिपाठी रसराज और उपनिदेशक सूचना ने सम्मानित किया ।

डाॅक्टर राजेन्द्र त्रिपाठी रसराज ने अपने मुख्य सम्बोधन में विस्तार से महाभारत और इतिहास के अन्य ग्रन्थों का उद्धरण देकर कौशाम्बी , वेद-व्यास के पूर्वजों ,जन्म आदि के बारे में अपने अनुसन्धान परक वक्तव्य में बताया कि वेद-व्यास के जन्म स्थान पर अब कोई भ्रम नहीं रहा और उन्होंने यहीं औदर में जन्म लिया था । उन्होंने इस अवसर पर कौशाम्बी के बारे मधुर काव्यपाठ किया और भगवान वेदव्यास के बारे में श्लोक वन्दना प्रस्तुत की।

अपने अध्यक्षीय भाषण में दिनेश कुमार गर्ग ने गोष्ठी के सफल आयोजन के लिए श्री सिद्ध आथर्वण रिसर्च काउन्सिल और कौशाम्बी शोध संस्थान तथा स्थानीय अध्येता शान्तनु शुक्ल को धन्यवाद और आभार ज्ञापन किया तथा आशा व्यक्त की की जनपद प्रशासन भगवान वेद-व्यास जन्मस्थान का संज्ञान लेगी और तदनुसार इसके विकास की व्यव्स्था करेगा । उन्होंने गोष्ठी के सफल आयोजन में सहयोग के लिए जिला प्रशासन को भी धन्यवाद दिया है ।

Ashok Kesarwani- Editor
Author: Ashok Kesarwani- Editor