महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम,निषेध एवं निवारण सुनिश्चित करता है पॉश एक्ट:अमित मिश्र

कौशाम्बी: महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम,निषेध एवं निवारण सुनिश्चित करता है पॉश एक्ट:अमित मिश्र,

यूपी के कौशाम्बी में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में करारी इंटर कॉलेज करारी में शोषण के विरुद्ध अधिकार,पॉश एक्ट व बच्चों के अधिकार विषय पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।

शिविर में चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल अमित कुमार मिश्र ने कहा कि महिलाओं और बालकों के संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण के लिए बहुत से कानून बने हुए हैं पर जानकारी के आभाव में लोग उन कानूनों का लाभ नहीं प्राप्त कर पा रहे हैं। इन कानूनों की सार्थकता तभी होगी जब इन कानूनों के बारे में आम जन में जागरूकता होगी। जब बच्चे और महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति सजग होंगे तो कोई भी उनका शोषण नहीं कर सकेगा।

उन्होंने बताया कि शोषण के विरुद्ध अधिकार किसी भी व्यक्ति (विशेष तौर से कमजोर वर्ग के लोगों को और बालकों को भी) गुलामी और अमानवीय परिस्थितियों से बचाते हैं। पॉश एक्ट आर्थत कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (निवारण, निषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 में महिलाओं को उत्पीड़न और कार्यस्थल पर सकारात्मक माहौल बनाने हेतु आंतरिक और परिवाद समितियों के गठन का प्रावधान किया गया है। पॉश एक्ट अर्थात कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 का उद्देश्य महिलाओं के लिएसुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल बनाना, महिलाओं को सशक्त बनाना, लैंगिक समानता को बढ़ावा देना, कानूनी सुरक्षा प्रदान करना, उत्पादकता और मनोबल बढ़ाना, कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध एवं निवारण सुनिश्चित करना भी है।

उन्होंने बताया कि विधिक सेवा प्राधिकरण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर टोल-फ्री नंबर 15100 है। आप इस पर भी कॉल कर शिकायत दर्ज कर सकते हैं साथ ही आमजन की सहूलियत के लिए जनपद न्यायालय परिसर में ई जन सेवा केन्द्र की भी स्थापना की गई है, पीड़ित वहां भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

शिविर में बाल अधिकारों पर बात करते हुए डॉ. नरेन्द्र दिवाकर ने कहा कि बालक मानव समाज के सबसे छोटे सदस्य हैं और किसी भी देश के भविष्य हैं। बाल अधिकार प्रत्येक बच्चे (बालक एवं बालिका दोनों) को, चाहे उनकी आयु, जाति, धर्म, लिंग, आर्थिक स्थिति या जन्मस्थान कुछ भी हो, अधिकार प्राप्त हैं। बाल अधिकार किसी भी बालक के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बाल अधिकार को मुख्यतया 4 अधिकारों यथा जीने का अधिकार, संरक्षण का अधिकार, विकास का अधिकार और सहभागिता का अधिकार, में बांटकर देखा जा सकता है। ये अधिकार बच्चों को गरिमा और समान अवसरों के साथ विकसित होने का अधिकारी बनाता है साथ ही उन्हें किसी भी प्रकार शोषण और उपेक्षा से भी बचाता है। बच्चे बहुत संवेदनशील होते हैं इसलिए उन्हें विशेष संरक्षण और सहायता का अधिकार है। भारतीय संविधान में कई ऐसे प्रावधान हैं जो जिनके बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान किया गया है।

महिला कल्याण विभाग कौशाम्बी से संरक्षण अधिकारी अजीत कुमार ने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं यथा स्पांसरशिप योजना, निराश्रित महिला पेंशन योजना, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना आदि के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान करते हुए कहा कि यदि किसी को यह पता चले कि कोई बाल विवाह हो रहा है तो उसकी जानकारी 1098 पर साझा करें। बाल विवाह रोकने के लिए सूचना देने वाले का नाम गोपनीय रखा जाएगा।

तहसील विधिक सहायता क्लीनिक के अध्यक्ष व तहसीलदार मंझनपुर ने कहा कि शोषण के विरुद्ध अधिकार से जुड़े प्रावधान भारतीय संविधान सहित कई कानूनों में दिए गए हैं। तहसील स्तर की किसी भी समस्या के लिए तहसील विधिक सहायता क्लीनिक में कार्यरत पैरा लीगल वालंटियर और हमसे संपर्क कर सकते हैं।कार्यक्रम में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान हेतु शपथ भी दिलाई गई।शिविर का संचालन शिक्षक विजय प्रताप सिंह तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रधानाचार्य सुरेन्द्र सिंह ने किया।

इस अवसर पर सखी वन स्टॉप सेंटर से वीणा रानी, शिक्षक राजेश चौधरी, डॉ. संदीप दिवाकर सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

Ashok Kesarwani- Editor
Author: Ashok Kesarwani- Editor