कौशाम्बी: पहले चरण पखारूँगा, फिर गंगा पार उतारूँगा-केवट संवाद ने मोहा मन,
यूपी के कौशाम्बी जिले में श्रीरामलीला कमेटी मंझनपुर द्वारा आयोजित रामलीला में शुक्रवार को केवट संवाद और दशरथ मरण का भावपूर्ण मंचन किया गया। मंच पर कलाकारों ने भगवान श्रीराम के वनवास के दौरान गंगा तट पर केवट से हुए संवाद तथा अयोध्या में पुत्र-वियोग में राजा दशरथ के प्राण त्यागने की मार्मिक कथा को जीवंत कर दिया। संवाद और अभिनय ने दर्शकों को भावुक कर दिया।
श्री रामलीला मैदान में केवट संवाद एवं दशरथ मरण का भावपूर्ण लीला का मंचन हुआ है। वनवास के दौरान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जब गंगा तट पर पहुंचे तो उन्हें नदी पार कराने के लिए केवट को बुलाया गया। श्रीराम ने नाव से पार ले जाने का आग्रह किया तो केवट ने कहा “प्रभु! सुना है आपके चरणों की धूल से पत्थर भी नारी बन गया था, मेरी नाव तो लकड़ी की है। कहीं यह भी नारी बन गई तो मेरा रोजगार चला जाएगा।” केवट ने प्रभु से पहले उनके चरण धोने की अनुमति मांगी। श्रीराम मुस्कुराए और केवट की भक्ति देखकर उसकी बात स्वीकार कर ली।
केवट ने श्रद्धा से प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के चरण धोए और उन्हें नाव में बैठाकर गंगा पार कराया। पार उतरने के बाद श्रीराम ने केवट को उतराई देनी चाही, लेकिन केवट ने हाथ जोड़कर कहा कि “आज मैंने आपको गंगा पार कराया है, जब मेरी बारी आए तो आप मुझे भवसागर से पार लगा देना।” केवट की भक्ति और प्रेम ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।
इधर अयोध्या में पुत्र राम के वनवास जाने का समाचार सुनकर राजा दशरथ का हृदय टूट गया। वे बार-बार राम को पुकारते रहे। दशरथ ने अपनी पुरानी घटना को याद करते हुए कहा कि “जिस प्रकार श्रवण कुमार के माता-पिता को पुत्र-वियोग का दुख मिला था, उसी प्रकार आज मैं भी राम के वियोग में तड़प रहा हूं।” पुत्र राम की याद में व्याकुल दशरथ अंततः “हे राम… हे राम…” कहते हुए प्राण त्याग देते हैं। दशरथ के मरण का दृश्य मंच पर आते ही रामलीला मैदान में सन्नाटा छा गया।
कलाकारों के मार्मिक अभिनय और संवादों ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं। राम के वनवास, केवट की निष्काम भक्ति और पिता दशरथ के पुत्र-वियोग की पीड़ा ने पूरी लीला को भावनात्मक बना दिया।
कमेटी अध्यक्ष आशीष केशरवानी उर्फ बच्चा भाई ने एक संदेश दिया कि रामलीला के प्रत्येक प्रसंग में जीवन के लिए एक संदेश छिपा है। केवट की भक्ति हमें निष्काम प्रेम और समर्पण की सीख देती है, जबकि दशरथ मरण पुत्र के प्रति पिता के प्रेम और वियोग की गहराई को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि कमेटी का प्रयास है कि रामलीला के माध्यम से नई पीढ़ी को भगवान श्रीराम के आदर्शों और भारतीय संस्कारों से जोड़ा जाए।
इस मौके पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष आशीष केसरवानी उर्फ बच्चा, महामंत्री पंकज गामा, पंकज शर्मा, उपाध्यक्ष ज्ञानचन्द्र गुप्ता, सुशील श्रीवास्तव, संगठन मंत्री झल्लर चौरासिया, सुशील केसरवानी, रोहित गुप्ता, सुनील श्रीवास्तव, सोने लाल, अजय वर्मा, अवधेश त्रिपाठी, रिंकू, सहित नगर के सम्भ्रान्त एवं आस-पास क्षेत्र के भारी संख्या में लोग मौजूद रहें।








