आत्मा और परमात्मा का मिलन ही रास है:संत राजेंद्र जी महाराज

कौशाम्बी: आत्मा और परमात्मा का मिलन ही रास है:संत राजेंद्र जी महाराज,

यूपी के कौशाम्बी जिले के सिराथू स्थित मां सीता वाटिका में चल रहे श्रीमद् भागवत सप्ताह भक्ति ज्ञान यज्ञ के पावन पवित्र छठे दिवस की पवन कथा की बेला में व्यास पीठ पर विराजमान राष्ट्रीय संत राजेंद्र जी महाराज के अमृत में वाणी के द्वारा श्रीमद् भागवत कथा का वाचन किया जा रहा है।

महाराज जी ने रासलीला का वर्णन करते हुए कहा की रास क्या है महारास क्या है और नित्य रास क्या है,एक गोपी एक कृष्ण,दो गोपी दो कृष्ण, अनंत गोपी अनंत कृष्ण यही है महारास, जिस रास को भगवान शिव देखने के लिए स्वयं गोपी का भेष धारण करके स्वयं जा रहे हैं वह कोई साधारण रास नहीं था, इसलिए श्रीधाम वृंदावन में आप जाते हैं जब तक गोपेश्वर भगवान के दर्शन प्राप्त नहीं करते हैं तो वृंदावन जाने का संपूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है।

महाराज जी ने बताया कि वृंदावन में प्रमुख रूप से सात ठाकुर जी के मंदिर प्रमुख रूप से है श्री गोविंद देव जी, श्री मदन मोहन जी, श्री राधा रमन जी, श्री राधावल्लभ लाल जी, श्री बांके बिहारी जी, श्री राधा दामोदर जी, श्री गोपीनाथ जी, कौन-कौन श्री श्याम सुंदर जी, जो वृंदावन में जाए यदि सात देवालयों का दर्शन प्राप्त करता है उसकी संपूर्ण ब्रजमंडल के दर्शन करने का फल प्राप्त होता है

उन्होंने कहा कि राम ने रावण का वध किया,श्री कृष्ण ने कंस का वध किया, दुर्योधन वध द्रोपदी के वजह से हुआ, रावण का वध इसलिए हुआ की माता सीता का अपमान किया, कंस ने देवकी का अपमान किया,दुर्योधन ने द्रोपदी का अपमान किया, इसलिए हमारे यहां जिस प्रकार शरीर में नाड़ी का महत्व है इस प्रकार हमारे समाज में नारी शक्ति का महत्व है, शक्ति से ही कृष्ण का जन्म होता है और शक्ति से ही राम का जन्म होता है, इसलिए नारी शक्ति का सम्मान सदैव होना चाहिए, जिस घर में नारी शक्ति का सम्मान होता है वहां लक्ष्मी का आगमन होता है।

रुक्मणी विवाह के पावन प्रसंग में महाराज जी ने कहा कि रुक्मी के द्वारा शीशपाल के साथ विवाह होना तय था लेकिन रुक्मणी ने स्वयं भगवान श्री कृष्ण को पति के रूप मैं स्वीकार किया भगवान ने वैदिक रीति रिवाज के माध्यम से विवाह किया और रुक्मणी जी को स्वीकार किया,सनातन धर्म सनातन संस्कृति के माध्यम से आठ प्रकार के विवाहों का वर्णन है जिसमें ब्रह्म विवाह सर्वोपरि है,सीता वाटिका के पावन प्रांगण से दिव्य ठाकुर जी की बारात का आगमन हुआ, राजाधिराज द्वारकाधीश का विवाह लक्ष्मी स्वरूप रुक्मणी जी के साथ विवाह संपन्न हुआ, दिव्य झांकी का दर्शन प्राप्त हुआ।

कल श्रीमद् भागवत कथा का विश्राम दिवस है कथा ठीक 3:00 से 7:00 बजे शाम तक चलेगी भागवत के 335 अध्याय के सार तत्व को बताया जाएगा द्वादश स्कंद की महिमा का वर्णन किया जाएगा। कलयुग में नाम की महिमा बताई जाएगी और सुदामा चरित्र क्या है विशेष वर्णन किया जाएगा। मुख्य श्रोत के रूप में रमाशंकर पांडे, सीता पांडे, सुनील पांडे, सुशील पांडे, सुधीर पांडे एवं इस क्षेत्र के समस्त श्रोतागण कथा का नित्यानंद प्राप्त कर रहे हैं।

Ashok Kesarwani- Editor
Author: Ashok Kesarwani- Editor