कौशाम्बी में देखे आखिर किसने कालेज प्रबंध तंत्र से परेशान कर्मचारी ने खून से खत लिखकर राष्ट्रपति से मांगी इच्छामृत्यु

कौशाम्बी,

कालेज प्रबंध तंत्र से परेशान कर्मचारी ने खून से खत लिखकर राष्ट्रपति से मांगी इच्छामृत्यु,

यूपी के कौशाम्बी जिले में पत्नी के इलाज के लिए कॉलेज प्रबंधन ने कर्मचारी को वेतन और छुट्टी नहीं दी,पैसे के अभाव में पत्नी का इलाज नहीं करा पाया और पत्नी एक बेटी, 2 बेटों और उसे अकेला छोड़ इस दुनिया से चली गई।जिसके बाद कर्मचारी ने जिंदगी से तंग आकर राष्ट्रपति को अपने खून से पत्र लिखकर परिवार सहित इच्छामृत्यु की इजाजत मांगी है।

यह कहानी कौशाम्बी जिले के एक कॉलेज के मैनेजमेंट के कुचक्र में उलझे कर्मचारी (परिचारक) की है। जो जिंदगी से हार कर अब परिवार के साथ राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की गुहार लगा रहा है, खास बात यह है कि उसे इलाहाबाद हाईकोर्ट से नौकरी पर वापस लेकर वेतन दिए जाने का आदेश भी मिला हुआ है,इसके बावजूद नौकरी देने के बाद वेतन न देकर कॉलेज का मैनेजमेंट उसका उत्पीड़न कर रहा है।

कौशाम्बी जिला मुख्यालय मंझनपुर के स्थानीय थाना क्षेत्र के बरौला गांव में जितेंद्र सिंह अपने परिवार के साथ रहते हैं। परिवार में पत्नी कुशला देवी (41) के अलावा एक बेटी योगिता सिंह, 2 बेटा कीर्ति सिंह व शिवांश सिंह हैं, परिवार बहुत खुश था लेकिन अप्रैल 1995 को परिवार की खुशियों को किसी की नजर लग गई। जितेंद्र सिंह के पिता गुलाब सिंह की गांव के प्राइमरी स्कूल के नजदीक चुनावी रंजिश में गोली मार कर हत्या कर दी गई थी।

जितेंद्र के पिता फतेहपुर जिले के धाता कस्बा स्थित चौ. रामरूप सिंह धनराज सिंह इंटर कॉलेज में सहायक अध्यापक थे। पिता की मौत के बाद मृतक आश्रित में उनके बेटे जितेंद्र सिंह को कॉलेज में चपरासी (परिचारक) की नौकरी नवंबर 1999 में मिली। नौकरी मिलने के बाद जितेंद्र को लगा कि परिवार पर टूटे दुख के पहाड़ में कुछ राहत की सांसें मिलेगी लेकिन ऐसा न हो सका।

जितेंद्र सिंह के मुताबिक, उन्होंने नौकरी जॉइन कर काम शुरू कर दिया। नौकरी के 5 साल तक ( साल 2003) सब कुछ ठीक रहा। कॉलेज प्रिंसिपल अमृत लाल सिंह से उन्होंने 5 साल बाद अपने प्रमोशन की मांग की। जिसके बाद कॉलेज प्रिंसिपल और प्रबंधन की नाराजगी का कहर झेलना शुरू हो गया। कॉलेज में वह नौकरी करने के लिए जाते तो उन्हें जबरिया अटेंडेंस रजिस्टर पर साइन नहीं करने दिया जाता।साजिश कर उन्हें कॉलेज से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। 15 साल इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुकदमा लड़ने के बाद उन्हें इंसाफ मिला।अदालत ने उनके पक्ष में फैसला देकर न सिर्फ नौकरी पर वापस लिए जाने का आदेश कॉलेज को दिया बल्कि मुकदमे के दौरान का भी वेतन देने का आदेश कॉलेज प्रबंधन को दिया। कॉलेज ने नौकरी पर बड़ी मुश्किल से वापस लेकर चपरासी की नौकरी दी।

जितेंद्र का आरोप है कि अब तक उन्हें प्रोमोशन नहीं दिया गया और न ही वह वेतन दे रहे हैं। कॉलेज प्रबंधन यदि उन्हें चपरासी के वेतन को देता है, तो भी उनका भुगतान 40 लाख रुपए देने चाहिए। जबकि अदालत के आदेश के मुताबिक कॉलेज को उन्हें बड़े बाबू के पद पर प्रमोट कर 80 लाख रुपए से अधिक का भुगतान करना है। जो अभी तक नहीं किया गया है। उन्हें महज 6 हजार रुपए देकर आर्थिक उत्पीड़न किया जा रहा है।

थक हार कर जितेंद्र सिंह ने अपने खून से लेटर लिखा है, जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु मांगी है। उन्होंने लिखा है- कॉलेज प्रशासन लगातार हमको परेशान कर रहा है। वह हमको नौकरी से निकलवाना चाहते हैं। हटाने के लिए कुचक्र रच रहे है। कॉलेज के रवैये से तंग आ गया हूं। महामहिम राष्ट्रपति महोदय से निवेदन है कि प्रार्थी को इंसाफ दिलाए या फिर इच्छामृत्यु की अनुमति प्रदान करें।

जितेंद्र सिंह को कॉलेज प्रशासन लगातार परेशान करता रहा। जिसमें उलझ कर जितेंद्र सिंह की पत्नी कुशला देवी ने ब्लड कैंसर से अक्तूबर 2023 में दम तोड़ दिया। जितेंद्र के 3 बच्चों के सिर से मां का साया छिन गया। जितेंद्र सिंह ने बताया, नौकरी में मुश्किल आने के बाद से पत्नी कुशला बीमार रहने लगी। उन्हें लगा घर की परेशानियों से पत्नी को सदमा लगा है। वह इलाज के लिए डॉक्टरों के चक्कर लगाते रहे। इस दौरान कॉलेज ने उन्हें छुट्टी देने से माना कर दिया।जितेंद्र सिंह ने बताया, कॉलेज के प्रबंधन के कुचक्र में फंस कर उन्होंने अपना सब कुछ बर्बाद कर दिया। इंसाफ के लिए 16 साल से कॉलेज के प्रबंध एवं अधिकारियों के चक्कर लगा रहा हूं, लेकिन कोई भी इन्हें प्रबंधन के कुचक्र से मुक्ति नहीं दिला पाया है। इसी कारण परेशान होकर एक आखिरी रास्ते को चुनते हुए देश के राष्ट्रपति को अपने खून से पत्र लिखकर इंसाफ मांग रहा हूं। इसके साथ ही उनसे इच्छा-मृत्यु दिए जाने की मांग की है।

इस मामले में कालेज के प्रबंधक अजय कुमार सिंह ने बताया, वह इस संबंध में ज्यादा जानकारी नहीं दे सकते। अधिक जानकारी के लिए प्रिंसिपल राम प्रताप सिंह ने आप संपर्क करें। प्रिंसिपल से संपर्क करने पर उन्होंने कॉलेज में आकर बात करने की बात कही है।

Ashok Kesarwani- Editor
Author: Ashok Kesarwani- Editor