नव साक्षरता परीक्षा में चार हजार से अधिक प्रौढ़ हुए शामिल

कौशाम्बी: नव साक्षरता परीक्षा में चार हजार से अधिक प्रौढ़ हुए शामिल,

यूपी के कौशाम्बी जिले में रविवार को साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा उल्लास नव भारत साक्षरता परीक्षा का आयोजन किया गया।यह परीक्षा जनपद के कई विद्यालयों में आयोजित हुई। जिले में इस परीक्षा के लिए 4700 लोगों ने पंजीकरण कराया था । परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए जिले के विभिन्न 400 विद्यालयों में परीक्षा केंद्र बनाए गए थे ताकि उन्हें अपने नजदीकी स्थान पर ही परीक्षा देने का अवसर मिल सके।

परीक्षा में प्रतिभागियों की पढ़ने, लिखने और बुनियादी गणना (न्यूमरेसी) से जुड़ी क्षमताओं का आकलन किया गया। परीक्षा समाप्त होने के बाद रविवार को ही परीक्षा केंद्र पर ही मूल्यांकन किया गया, ताकि परिणाम जल्द तैयार किए जा सके। सफल अभ्यर्थियों को राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) बेसिक साक्षरता प्रमाण पत्र प्रदान करेगा।

इस साक्षरता अभियान का उद्देश्य उन लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है, जो किसी कारणवश स्कूल नहीं जा सके थे। अब ये महिलाएं अपने दैनिक कार्यों, बैंक लेनदेन और डिजिटल जानकारी के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहेंगी।

जनपद के प्रबुद्ध नागरिकों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम समाज में शिक्षा के महत्व को बढ़ावा देते हैं और लोगों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।

बीएसए डॉ.कमलेंद्र कुशवाहा ने बताया कि उल्लास – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम, जिसे न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम के नाम से भी जाना जाता है, केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित एक पहल है जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है। इसका उद्देश्य सभी पृष्ठभूमियों के 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के उन वयस्कों को सशक्त बनाना है जिन्होंने औपचारिक स्कूली शिक्षा प्राप्त नहीं की है, ताकि वे समाज में एकीकृत हो सकें और राष्ट्र के विकास में योगदान दे सकें।

यह कार्यक्रम पढ़ने, लिखने और अंकगणित कौशल सहित कार्यात्मक साक्षरता प्रदान करने पर केंद्रित है, और शिक्षार्थियों को महत्वपूर्ण जीवन कौशल से समृद्ध करता है, जिससे आजीवन सीखने को बढ़ावा मिलता है।

स्वयंसेवा के माध्यम से कार्यान्वित, उल्लास सामाजिक जिम्मेदारी और कर्तव्य की भावना ‘कर्तव्य बोध’ को बढ़ावा देता है, और शिक्षार्थियों को दीक्षा पोर्टल और उल्लास मोबाइल ऐप/पोर्टल के माध्यम से क्षेत्रीय भाषाओं में शैक्षिक सामग्री तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित करता है।

शिक्षार्थियों और स्वयंसेवी शिक्षकों को दिए जाने वाले प्रमाण पत्र आत्मविश्वास और प्रेरणा को और बढ़ाते हैं, जिससे निरंतर प्रगति को बढ़ावा मिलता है।

Ashok Kesarwani- Editor
Author: Ashok Kesarwani- Editor