कौशाम्बी,
डीएम मधुसूदन हुल्गी ने फाइलेरिया की दवा खाकर निभाई जिम्मेदारी- अब है आपकी बारी,
यूपी के कौशाम्बी जिले में लाइलाज बीमारी फाइलेरिया के उन्मूलन के लिए सर्वजन दवा सेवन (आईडीए) अभियान शनिवार से शुरू किया गया, जो कि 2 सितंबर 2024 तक चलेगा।अभियान की शुरूआत सीएमओ कार्यालय मंझनपुर से डीएम मधुसूदन हुल्गी और सीएमओ डॉ संजय कुमार ने फाइलेरिया की गोली खाकर किया ।
इस अभियान के दौरान आशा कार्यकत्री व स्वास्थ्यकर्मी घर – घर जाएंगे और अपने सामने ही एक वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन कराएंगे। गर्भवती और अति गंभीर बीमार को दवा का सेवन नहीं करना है । एक से दो वर्ष तक के बच्चों को सिर्फ पेट के कीड़े निकालने की दवा खिलाई जाएगी ।
डीएम ने जनपदवासियों से अपील की है कि वह खुद दवा का सेवन करें और आस-पास के लोगों को दवा सेवन के लिए प्रेरित करें। दवा का सेवन खाली पेट नहीं करना है । स्वास्थ्यकर्मी के सामने ही दवा खानी है । दवा का सेवन सिर्फ फाइलेरिया मरीज को नहीं, बल्कि एक वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति को करना है । पांच साल में पांच बार यानी साल में एक बार इस दवा का सेवन कर लेने से फाइलेरिया (हाथीपांव व हाइड्रोसील) से बचाव होगा । उन्होंने फाइलेरिया उन्मूलन की शपथ दिलाई और अभियान के समर्थन में हस्ताक्षर भी किया ।
सीएमओ डॉ संजय कुमार ने बताया कि जिले की करीब 15 लाख की आबादी को दवा का सेवन कराया जाएगा । दवा के निर्धारित डोज का सेवन आशा कार्यकत्री या स्वास्थ्यकर्मी के सामने ही करना है । अगर टीम पहुंचने पर घर का कोई सदस्य उपस्थित नहीं है तो वह आशा के घर जाकर उनके सामने ही दवा का सेवन करें ।
अभियान के संचालन के लिए 1070 टीम बनाई गई हैं, फाइलेरिया से बचाव की दवा शरीर में इसके परजीवियों को मारती है,जिसके प्रतिक्रिया स्वरूप कभी कभी सिर दर्द, शरीर दर्द, बुखार, उल्टी और बदन पर चकत्ते जैसे लक्षण सामने आते हैं । यह लक्षण स्वतः ठीक हो जाते हैं और जिनमें यह लक्षण आ रहे हैं उन्हें खुश होना चाहिए कि वह फाइलेरिया से मुक्त हो रहे हैं। जरूरी समझने पर आशा कार्यकर्ता की मदद से रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र की सेवाएं ले सकते हैं ।
उन्होंने बताया कि जिले में हाथीपांव के 658 और हाइड्रोसील के 387 मरीज चिन्हित हैं । फाइलेरिया ग्रसित इन जैसे और भी मरीज न आएं इसी उद्देश्य से बड़ी आबादी को दवा का सेवन करवाना होगा, जिसमें सामुदायिक सहयोग अपेक्षित है ।
जिला मलेरिया अधिकारी अनुपमा मिश्रा ने कहा कि फाइलेरिया बीमारी संक्रमित मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होती है । मच्छरदानी के प्रयोग और आस-पास साफ सफाई रखने के साथ साथ साल में एक बार दवा के सेवन से ही इस बीमारी से बचा जा सकता है । यह बीमारी विश्व में दीर्घकालिक दिव्यांगता का दूसरा प्रमुख कारण है । एक बार हाथीपांव या हाइड्रोसील हो जाने पर उसे सिर्फ नियंत्रित किया जा सकता है, पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता । दवा सेवन ही श्रेष्ठ उपाय है ।
जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि दवा सेवन के प्रति लोगों को जागरूक करने में पाथ, डब्लूएचओ,पीएसआई, सीफर का सहयोग मिल रहा है।कार्यक्रम में नोडल अधिकारी वीबीडी डॉ राहुल सिंह डिप्टी सीएमओ डॉक्टर सुनील सिंह डॉ हिमांशु भूषण,मलेरिया विभाग के एएमओ, एमआई, व कार्यालय के सभी अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे |