विश्व कुष्ठ उन्मूलन दिवस पर आयोजित हुआ सेमीनार,दी गई महत्वपूर्ण जानकारी

कौशाम्बी: विश्व कुष्ठ उन्मूलन दिवस पर आयोजित हुआ सेमीनार,दी गई महत्वपूर्ण जानकारी,

यूपी के कौशाम्बी जिले में विश्व कुष्ठ उन्मूलन दिवस के अवसर पर स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय कौशाम्बी द्वारा कुष्ठ रोग के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने हेतु सेमीनार का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित छात्र-छात्राओ एव अन्य प्रतिभागियों को कुष्ठ रोग के लक्षण, उपचार तथा इससे जुड़ी भ्रांतियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्य डा0 हरिओम कुमार सिंह ने बताया कि कुष्ठ रोग एक पूर्णतः उपचार योग्य रोग है तथा समय पर पहचान और नियमित दवा सेवन से रोगी पूर्ण रूप से स्वस्थ जीवन जी सकता है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि कुष्ठ रोगियों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। महाविद्यालय के अधिकारियों कर्मचारियों से अपील की गई कि यदि किसी व्यक्ति में कुष्ठ रोग के लक्षण दिखाई दें तो महाविद्यालय पर तुरंत जांच कराएं। सरकार द्वारा कुष्ठ रोग का उपचार निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।

इसके बाद कम्युनिटी मेडिसिन के डा0 सन्तोष कुमार ने बताया कि कुष्ठ रोग एक दीर्घकालिक संक्रामक रोग है, जो माइकोवैक्टीरियल लेप्रे जीवाणु के कारण होता है। उत्तर प्रदेश में प्रिवलेन्स रेट 0.37/10000 है, यह मुख्य रूप से त्वचा, परिधीय तंत्रिकाओं, ऊपरी श्वसन मार्ग की श्लेष्मा झिल्ली एवं आँखों को प्रभावित करता है। रोग का संक्रमण धीमी गति से होता है तथा इसके लक्षण विकसित होने में लंबा समय लग सकता है। समय पर पहचान और पूर्ण उपचार न होने की स्थिति में यह रोग शारीरिक विकलांगता के आपरेशन हेतु भारत सरकार चलाये गये योजना में कुष्ठ रोगी को 12000 रू0 की सहायता प्रदान की जाती है।

पैथोेलाजी विभाग के डा0 रविरंजन सिंह ने बताया कि कुष्ठ रोग माइकोवैक्टीरियल लेप्री जीवाणु से होने वाला एक दीर्घकालिक संक्रामक रोग है, जो मुख्यतः त्वचा एवं परिधीय तंत्रिकाओं को प्रभावित करता है। रोग के कारण त्वचा पर सुन्नता, दाग-धब्बे तथा नसों की क्षति हो सकती है। कुष्ठ रोग का वर्गीकरण नैदानिक लक्षणों एवं जीवाणु भार के आधार पर किया जाता है। कार्यक्रमात्मक दृष्टि से विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इसे पाउसीबैसिलरी एवं मल्टीबैसिलरी दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जिससे उपचार की अवधि एवं दवा योजना निर्धारित की जाती है।

माइक्रोबायोलाजी विभाग के डा अरिन्दम चक्रवर्ती ने बताया कि संदिग्ध रोगी स्लिट स्किन इस्मियर के माध्यम से त्वचा के नमूने लिये जाते है इसमें कुष्ट रोगी जीवाणु का पता लगाया जाता है उसके अनुसार उपचार किया जाता है, फार्माकोलाजी विभाग के डा0 आत्मिक सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम का उद्देश्य कुष्ठ रोग की शीघ्र पहचान, प्रभावी उपचार एवं इससे होने वाली विकलांगता की रोकथाम करना है। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय पर मल्टी ड्रग थेरेपी निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है।

चर्म रोग विभाग के डा0 सौरभ कृष्ण मिश्र ने बताया कि कुष्ठ रोग का उपचार मल्टी ड्रग थेरेपी द्वारा किया जाता है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अनुशंसित है। रोग के प्रकार के अनुसार उपचार की अवधि निर्धारित की जाती है। पाउसीबैसिलरी कुष्ठ रोग में सामान्यतः 6 माह तक तथा मल्टीबैसिलरी कुष्ठ रोग में 12 माह तक नियमित दवा दी जाती है। उपचार पूरा करने पर रोगी पूर्णतः स्वस्थ हो सकता है और संक्रमण आगे नहीं फैलता। रोगियों को नियमित दवा सेवन, फॉलो-अप जांच एवं स्वयं देखभाल के लिए प्रेरित किया जाता है।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज से कुष्ठ रोग से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों को समाप्त करना एवं “कुष्ठ मुक्त भारत” के लक्ष्य को साकार करना है। कार्यक्रम के अन्त में डा0 राकेश कुमार शुक्ला द्वारा विश्व कुष्ठ उन्मूलन हेतु शपथ भी दिलायी गयी।

कार्यक्रम में मुख्य चकित्सा अधीक्षक, डा0 सुनील कुमार शुक्ला, चिकित्सा अधीक्षक डा0 विश्व प्रकाश, डा0 सुरभि प्रकाश, डा0 पंकज कुमार तिवारी, डा0 संजीव सिंह, डा0 अंकित कुमार तिवारी, डा0 नन्दनी राधव, डा0 प्रांजल मिश्रा डा0 संदीप कुमार, एवं अन्य संकाय सदस्य तथा महाविद्यालय में कार्यरत सीनियर रेजीडेण्ट, जूनियर रेजीडेण्ट एवं कर्मचारी, इन्र्टन व एम0बी0बी0एस0 प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के छात्र-छात्रायें उपस्थित रहें।

 

 

Ashok Kesarwani- Editor
Author: Ashok Kesarwani- Editor