कौशाम्बी: पशु क्रूरता निवारण एवं देखभाल पर गर्दभ मेला कड़ा में आयोजित हुआ दो दिवसीय विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर,
यूपी के कौशाम्बी जिले में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कौशाम्बी के तत्वावधान में विराट पशु गर्दभ मेला कड़ा के ऐतिहासिक गर्दभ मेला मैदान में पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण एवं देखभाल विषय पर दो दिवसीय विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
जागरूकता शिविर में डॉ. नरेन्द्र दिवाकर द्वारा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि पशुओं को अनावश्यक पीड़ा या यातना पहुंचाने के निवारणार्थ और उस प्रयोजन के लिए पशुओं के संरक्षण हेतु पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 है। पशु मानव जीवन और सह-अस्तित्व के सबसे बड़े सहयोगी हैं, इसलिए पशु स्वामियों का कर्तव्य है कि वे पशुओं को अनावश्यक पीड़ा न पहुंचाएं एवं उन्हें किसी के द्वारा पीड़ा पहुंचाने से रोकें व उनकी आवश्यक देखभाल करें।
उन्होंने कहा कि पशुओं के जीवन को संकटापन्न करने वाली किसी परिस्थिति में उनका परिवहन करना, उनके जीवन को संकटापन्न करने के आशय से भोजन पानी आदि का लोप करना दंडनीय है। जिसमें सजा और जुर्माना दोनों हो सकते हैं।राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एएलएम) के तहत अश्व प्रजाति (गधा, घोड़ा आदि) की घटती संख्या को रोकने व संरक्षण हेतु सरकार द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान करने की भी जानकारी दी गई।
पशु चिकित्साधिकारी कड़ा डा. अनिल सिंह ने बताया कि अश्व प्रजाति के पशु सदैव मनुष्य के दैनंदिन जीवन में सहयोगी रहे हैं। भार ढोने वाले पशुओं को विशेष देखभाल और रख-रखाव की जरूरत होती है। अश्व प्रजाति के मवेशियों को अन्य मवेशियों के साथ नहीं बांधना चाहिए। मल हटाते समय या अस्तबल की साफ-सफाई करते समय ग्लव्स का उपयोग अवश्य करना चाहिए।
कोलिक अश्व में पेटदर्द की बीमारी है इससे बचने के लिए दिन भर में 6 से 7 बार पानी पिलाकर व कीड़े मारने वाली दवा 6 माह के अन्तराल पर देते रहें। पशु स्वामियों की किसी भी प्रकार समस्या होने पर अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय में अवश्य दिखाएं।
ममता दिवाकर ने बताया कि पशु पालकों को पशुओं से भी प्यार और सम्मान से पेश आना चाहिए। पशुओं की भावनाओं को समझें और उनका ध्यान रखें कि वे काम क्यों नहीं करना चाहते? पशु भी सम्मान के भूखे होते हैं। बेवजह उनको यातना देने से बचें जिससे वे ताउम्र आपका साथ देते रहें।
उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी सिराथू डा. रवींद्र कुमार ने बताया कि ग्लैण्डर्स एन्ड फार्सी जैसी बीमारी लाइलाज है, इसमें पशु पालकों को पशु का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है क्योंकि इससे पशुपालकों को भी खतरा हो सकता है।अक्सर पशु स्वामी अधिक भर लाद देते हैं जो कि पशु को पीड़ा तो पहुंचाता ही है साथ ही पशु को चोटिल भी करता है। उनके रखरखाव के लिए जरूरी है कि छोटी-छोटी बातों का ख्याल रखना चाहिए। लकड़ी के खूंटे और लोहे के रॉड से पशुओं को नहीं बंधना चाहिए। किसी भी प्रकार का घाव होने पर नीम की पत्ती उबालकर धुलकर हल्दी पाउडर को सरसों तेल में भिगोकर लगाएं। सर्रा नामक बीमारी होने पर लहसुन के रस को सरसों के तेल में मिलाकर लगाएं।
साथ ही उपस्थित सभी लोगों को साक्षरता शिविर में यह संकल्प दिलाया गया कि वे भविष्य में कभी भी किसी पशु के साथ क्रूरतापूर्ण व्यवहार नही करेंगे और सभी पशुओं के संरक्षण का प्रयास करेंगे।वर्ष इन एक बार रक्त जांच अवश्य कराएं, जो कि पशु चिकित्सालय में पूरी तरह से निःशुल्क है।
पीएलवी ममता दिवाकर ने बताया कि किसी भी प्रकार की विधिक सहायता या निःशुल्क पैरवी हेतु अधिवक्ता के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय या फिर क्षेत्र के पीएलवी से संपर्क कर आवेदन दें।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ द्वारा संचालित किये जा रहे विभिन्न प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों और प्रदान की जा रही सुविधाओं आदि के बारे में भी बताया।
एसडीएम सिराथू योगेश कुमार गौड़, थानाध्यक्ष कड़ा त्रिलोकीनाथ पाण्डेय समय-समय पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे और शिविर का भी निरीक्षण किया।
सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कौशाम्बी आस्था मिश्रा ने गर्दभ मेला में लगे विधिक साक्षरता और जागरूकता शिविर का आकस्मिक निरीक्षण कर पीएलवी द्वारा पशु पालकों को प्रदान की जाने वाली जानकारियों व सेवाओं का जायजा लिया और आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
शिविर में नायब तहसील दार सिराथू विनय सिंह, आर आई लव प्रसाद द्विवेदी, क्षेत्रीय लेखपाल देवेंद्र सिंह, अधिशासी अधिकारी दिनेश सिंह, पीएलवी अमरेन्द्र प्रताप सिंह, कृष्णा कपूर, ज्योत्स्ना सोनकर, सहित सैकड़ों की संख्या में पशु स्वामी एवं ग्रामवासी मौजूद रहे।








