एस एस पब्लिक इंटर कॉलेज बलीपुर टाटा चायल में आयोजित हुआ विधिक साक्षरता एवं जागरुकता शिविर

कौशाम्बी: एस एस पब्लिक इंटर कॉलेज बलीपुर टाटा चायल में आयोजित हुआ विधिक साक्षरता एवं जागरुकता शिविर,

यूपी के कौशाम्बी में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जनपद न्यायालय के तत्वावधान में एस एस पब्लिक इण्टर कॉलेज बलीपुर टाटा चायल में महिला सशक्तिकरण, महिलाओं के अधिकार, यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधि० (पॉक्सो) 2012, शोषण के विरूध अधिकार, लैंगिक समानता, नशा मुक्त एवं बाल विवाह मुक्त भारत अभियान विषय पर साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।

डॉ. नरेन्द्र दिवाकर ने लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण पर अपनी बात रखते हुए कहा कि भारत में महिला सशक्तिकरण और महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण के लिए कई प्रमुख कानून बनाए गए हैं, जो कार्यस्थल, घर और समाज में उनके अधिकारों की रक्षा करते हैं। घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम (2005), कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम (2013), दहेज निषेध अधिनियम (1961), और समान पारिश्रमिक अधिनियम (1976) प्रसूति प्रसुविधा (संशोधन) अधिनियम 2017,अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम 1956, महिलाओं का अशिष्ट चित्रण (निषेध) अधिनियम 1986, हिंदू विवाह अधिनियम 1955 आदि के बारे में जानकारी प्रदान की।

उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 15 भी जाति, धर्म, नस्ल और लिंग के आधार पर भेद को प्रतिबंधित करता और लैंगिक समानता की बात करता है।लैंगिक समानता का तात्पर्य है लिंग की परवाह किए बिना महिलाओं, पुरुषों और थर्ड जेंडर लोगों को समान अधिकार, समान अवसर, समान वेतन, समान जिम्मेदारियां और समान संसाधन प्राप्त होना।हमारे देश में लड़कियों और लड़कों के बीच न केवल घरों और समुदायों में है अपितु हर जगह लिंग असमानता दिखाई देती है। लैंगिक असमानता दूर करने के लिए महिलाओं, बच्चों और थर्ड जेंडर लोगों को शिक्षा और कौशल विकास के साथ-साथ भयमुक्त माहौल अर्थात सुरक्षित वातावरण प्रदान करना होगा साथ ही रोजगार के क्षेत्र में लैंगिक असमानता को दूर करना होगा तथा सभी क्षेत्रों में जेंडर आधारित भेदभाव को समाप्त कर लैंगिक समानता को बढ़ावा देना होगा।

असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल तिलक नारायण ने कहा कि लैंगिक समानता एक मौलिक मानवाधिकार है जो समावेशी विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और निर्णय लेने में भागीदारी सुनिश्चित करता है। यह केवल महिलाओं का मुद्दा ही नही है, बल्कि इससे पूरा समाज प्रभावित होता है और यह सतत विकास के लिए बहुत आवश्यक है।शोषण के विरुद्ध अधिकार किसी भी व्यक्ति को गुलामी और अमानवीय परिस्थितियों से बचाते हैं। शोषण के विरुद्ध अधिकार से जुड़े प्रावधान भारतीय संविधान (अनु. 23 और 24) सहित कई कानूनों में दिए गए हैं। अनैतिक व्यापार अधिनियम,किशोर न्याय अधिनियम, शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, बाल श्रम निषेध (संशोधन) अधिनियम, और यौन अपराधों से बच्चों की सुरक्षा (पॉक्सो) अधिनियम, बंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम हैं, जो बच्चों को शिक्षा, शोषण से सुरक्षा प्रदान करते हैं और सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करते हैं।शोषण के विरुद्ध अधिकार महिलाओं और बच्चों के अनैतिक व्यापार, बेगार, बंधुआ मजदूरी का उन्मूलन, बालश्रम पर रोक लगाने के साथ ही सुनिश्चित करता है कि श्रमिकों के साथ गुलामों की तरह व्यवहार न हो और उन्हें उनके काम करने के लिए न्यायसंगत वेतन व सम्मानजनक स्थितियां मिले।

पराविधिक स्वयं सेवक ममता दिवाकर ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण समाज के कमजोर और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (जिनकी आय सीमा के भीतर है) को निःशुल्क कानूनी सहायता, परामर्श और लोक अदालत के माध्यम से न्याय प्रदान करता है। आपदा पीड़ितों को क्षतिपूर्ति भी प्रदान की जाती है। इसके लिए पीड़ित अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) का सदस्य होना चाहिए,महिलाएं और बच्चे (18 वर्ष तक)।मानसिक रूप से बीमार या विकलांग व्यक्ति।प्राकृतिक आपदा, जातीय हिंसा या औद्योगिक आपदा के शिकार।औद्योगिक कामगार।हिरासत में लिए गए व्यक्ति (जेल में)।वह व्यक्ति जिसकी वार्षिक आय तीन लाख या इससे कम वाले व्यक्ति भी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से सहायता प्राप्त कर सकते हैं। किसी भी समस्या के लिए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण हेल्प लाइन नंबर 15100, टोलफ्री 18004190234 की भी जानकारी या सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

महिला एवं बाल कल्याण विभाग से सविता देवी यादव ने केन्द्र और राज्य सरकार के द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं यथा मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना, स्पांसरशिप योजना, कन्या सुमंगला योजना, वृद्धापेंशन और निराश्रित महिला पेंशन योजना, दिव्यांग सहायता योजना, विभिन्न हेल्पलाइन नंबर जैसे 1098, 1090, 181आदि के बारे में भी विस्तार से जानकारी प्रदान किया।

शिविर के मुख्य अतिथि तहसील विधिक सहायता क्लीनिक के अध्यक्ष एवं तहसीलदार चायल पुष्पेन्द्र गौतम ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का अर्थ महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक, कानूनी और राजनीतिक रूप से स्वतंत्र, आत्मविश्वासी और निर्णय लेने में सक्षम बनाना है। इसका उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के समान अवसरों के माध्यम से लैंगिक असमानता को खत्म करना और महिलाओं को पुरुष के बराबर अधिकार प्रदान करना है। महिलाओं को सशक्त कर ही हम न्यायपूर्ण और उन्नत समाज का निर्माण कर सकते हैं। अच्छी शिक्षा व्यक्ति को सशक्त नागरिक बनाती है इसलिए आप सब मन लगाकर पढ़ाई करें और अपने तथा माता-पिता के सपनों को पूरा करें। उन्होंने बताया कि तहसील विधिक सहायता क्लीनिक में फिर से पैरा लीगल वालंटियर की सेवाएं प्रत्येक कार्य दिवस पर सुचारू रूप से शुरू हो गई हैं, पीड़ित लोग अपनी समस्याओं के समाधान हेतु तहसील में कार्यरत पीएलवी से संपर्क कर सकते हैं।इस दौरान शिविर में उपस्थित विद्यार्थियों को नशा मुक्त भारत एवं बाल विवाह मुक्त भारत बनाने की शपथ भी दिलवाई गई।कार्यक्रम का संचालन पीएलवी अमरदीप दिवाकर ने तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रबंधक ओम नारायण सिंह ने दिया।

इस अवसर पर महिला कल्याण विभाग से मनोज कुमार, हल्का लेखपाल संदीप कुमार, डॉ. नरेन्द्र दिवाकर, विद्यालय के प्रबंधक ओमनारायण सिंह, शिक्षक-शिक्षिकाएं अनुजा, अमित कुमार, नैन्शी सिंह, दीपा, विमला, आरती, राजेंद्र कुमार, सोनम, विद्योतमा एवं पैरा लीगल वालंटियर ममता दिवाकर, दिवाकर एवं अमरदीप दिवाकर सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।

 

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कौशाम्बी

Ashok Kesarwani- Editor
Author: Ashok Kesarwani- Editor