सामाजिक, आर्थिक, पारंपरिक परिस्थितियों और अज्ञानता के कारण होते हैं बाल विवाह- संजय कुमार

कौशाम्बी: सामाजिक, आर्थिक, पारंपरिक परिस्थितियों और अज्ञानता के कारण होते हैं बाल विवाह- संजय कुमार,

यूपी के कौशाम्बी जिले में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जनपद न्यायालय कौशाम्बी के तत्वावधान में उदय प्रकाश इंटर कॉलेज सिरसी चरवा चायल कौशाम्बी मे सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा पारित निर्णयों का व्यापक प्रचार-प्रसार, नशा मुक्त एवं बाल विवाह मुक्त भारत अभियान, शोषण के विरुद्ध अधिकार, पॉश एक्ट व बच्चो के अधिकार विषय पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।

डॉ. नरेन्द्र दिवाकर ने पॉक्सो एक्ट अर्थात यौन अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 पर बात करते हुए कहा कि यह अधिनियम जेण्डर न्यूट्रल है, इस अधिनियम में बालक शब्द के तहत लड़का और लड़की दोनों को शामिल किया गया है। इसमें गंभीर मामलों में मृत्युदंड तक की सजा का प्रावधान है।

पॉश एक्ट पर बात करते हुए कहा कि यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 यौन उत्पीड़न की शिकार पीड़िता की शिकायतों के लिए एक संरचित शिकायत निवारण तंत्र प्रदान कर कार्यस्थल पर समानता और समावेशिता को बढ़ावा देता है जिससे महिला कर्मचारियों की भागीदारी और उत्पादकता भी बढ़े।

उन्होंने शोषण के विरूद्ध अधिकार और बाल अधिकार पर बात करते हुए कहा कि बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर कई कानूनी प्रावधान हैं।शोषण के विरुद्ध अधिकार किसी भी व्यक्ति को गुलामी और अमानवीय परिस्थितियों से बचाते हैं। शोषण के विरुद्ध अधिकार से जुड़े प्रावधान भारतीय संविधान (अनु. 23 और 24) सहित कई कानूनों में दिए गए हैं। अनैतिक व्यापार अधिनियम 1956, किशोर न्याय अधिनियम (2015), शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम (2009), बाल श्रम निषेध (संशोधन) अधिनियम (2016), और यौन अपराधों से बच्चों की सुरक्षा (POCSO) अधिनियम (2012), बंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम 1976 तथा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21A, 24, और 39 शामिल हैं, जो बच्चों को शिक्षा, शोषण से सुरक्षा प्रदान करते हैं और सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करते हैं।

पीएलवी ममता दिवाकर ने मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना, कन्या सुमंगला योजना, वृद्धापेंशन और निराश्रित महिला पेंशन योजना, दिव्यांग सहायता योजना, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा प्रदत्त सेवाओं आदि के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान किया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि संजय कुमार नायब तहसीलदार चायल ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण समाज के कमजोर और आर्थिक रूप से अक्षम वर्गों को मुफ्त विधिक सहायता प्रदान करता है, ताकि समानता के आधार पर सबको न्याय मिले।

उन्होंने कहा कि बाल विवाह और नशा जैसी कुप्रथाएं हमारे समाज में व्याप्त गंभीर समस्याएं हैं। सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों और अज्ञानता के कारण बाल विवाह जैसी कुप्रथा का जन्म होता है। इसके उन्मूलन के लिए ही बाल विवाह निषेध अधिनियम बनाया गया। यदि कहीं पर बाल विवाह होते पाया जाय तो कोई भी इसकी सूचना चाइल्ड लाइन नंबर 1098 पर या बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी को जरूर दें।

इस दौरान शिविर में उपस्थित विद्यार्थियों को नशा मुक्त भारत एवं बाल विवाह मुक्त भारत बनाने की शपथ भी दिलवाई गई।कार्यक्रम का संचालन प्रधानाचार्य श्री ओम प्रकाश धन्यवाद ज्ञापन विद्यालय प्रबंधक श्री निवास यादव ने दिया।

इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य ओम प्रकाश, पैरा लीगल वालंटियर ममता दिवाकर, शिक्षक श्याम नारायण, पंकज सिंह, पप्पू दिवाकर, सुनील कुमार, दिनेश कुमार, शिव प्रकाश, घनश्याम, शिव शंकर सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

Ashok Kesarwani- Editor
Author: Ashok Kesarwani- Editor