पंच प्रण से हिंदुत्व आवरण और पंच तत्व से बचेगा पर्यावरण:ओम प्रकाश

कौशाम्बी: पंच प्रण से हिंदुत्व आवरण और पंच तत्व से बचेगा पर्यावरण:ओम प्रकाश,

यूपी के कौशाम्बी जिले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के के चल रहे शताब्दी वर्ष में कार्यकर्ताओं ने भारत माता के चित्र पर पूजन एवं वंदे मातरम भारत माता की जय गान के साथ देश भक्ति के भाव को जागृत करते हुए पर्यावरण को सुरक्षित करने के लिए सैकड़ों युवाओं के साथ साहसिक साइकिल यात्रा करते हुए जन जागरण करने का संदेश सिराथू से निकाल कर कड़ाधाम और फिर कड़ाधाम से चलकर के दुर्गा भाभी सेतु होते हुए पुनः सिराथू आकर साइकिल यात्रा को पूर्ण किए। इस मौके पर स्वयं ओम प्रकाश विभाग प्रचारक ने साइकिल से यात्रा किया।

इस दौरान मुख्य वक्ता ओमप्रकाश विभाग प्रचारक ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण के लिए कई पहल किए जा रहे हैं, जिनमें वृक्षारोपण अभियान,एक थाली,एक थैला जैसे हरित कुंभ अभियान और प्लास्टिक-थर्मोकोल मुक्त भारत के लिए जागरूकता फैलाना शामिल है,ताकि जल संरक्षण,प्रदूषण कम करने और स्थानीय संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा मिले,जिसके लिए बाकायदा एक पर्यावरण विभाग भी बनाया गया है,हम में से शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जो पर्यावरणीय परिवर्तनों से प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित न हुआ हो पर्यावरण क्षति सभी के जीवन को प्रभावित कर रही है।

उन्होंने बताया कि एक समय था जब लगभग 50 – 100 फीट बोरिंग करने पर सहायता से पानी उपलब्ध हो जाता था परंतु आज 300-400 फीट बोरिंग करने के बाद भी पानी की उपलब्धता नहीं हो पा रही है, इसका कारण हमारे द्वारा जल का अनियोजित उपभोग है साथ ही साथ जल संरक्षण के प्रति सचेत न होना इसका दूसरा प्रमुख कारण है, उन्होंने बताया कि विभिन्न अखबारों के माध्यम से हम पढ़ते हैं कि ऐसे अनेक क्षेत्र हैं जहां पर पीने के पानी की बहुत बड़ी समस्या है, भविष्य में यह परिस्थितियां और भी भयावह होने की संभावनाएं हैं।निश्चित रूप से हमारे देश में कहावतें बनाने वाले बड़े ही व्यावहारिक और दूरदर्शी हुआ करते थे, इसी प्रकार एक कहावत है कि जा के पैर न फटी बिवाई सो का जाने पीर पराई यह कहावत, आज पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में बहुत ही सार्थक परिलक्षित हो रही है क्योंकि जब कोई समस्या सामने आती है तभी लोग बड़ी-बड़ी बातें और रणनीति बनाते हैं ,परंतु जैसे वक्त निकल जाता है कहानी फिर पुरानी ढर्रे पर चलने लगती हैं। यही बात हमारे पर्यावरण संरक्षण पर सटीक बैठती है।

उन्होंने कहा कि आवश्यक है कि परिस्थितियों को अपने हाथ से निकलने की पूर्व हमें पर्यावरण के प्रति न केवल सचेत होना चाहिए बल्कि उसे संरक्षित और सुरक्षित करने का हर संभव प्रयास करना चाहिए,पर्यावरण संरक्षण से तात्पर्य हमारे आसपास के वातावरण,पेड़-पौधे,पशु-पक्षी,हवा,पानी के संरक्षण से है।प्रकृति और मनुष्य एक दूसरे के पूरक हैं।पर्यावरण के बिना मनुष्य के जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। लगातार प्रकृति का दोहन के स्थान पर लालची होकर शोषण करने वाली प्रवृत्ति,अनियोजित औद्योगिक विकास के फल स्वरुप उत्सर्जित होने वाले ग्रीनहाउस गैस और क्लोरोफ्लोरो कार्बन ने लोगों का सुकून छीन लिया है।

पर्यावरण संरक्षण का उतना ही महत्व है जितना मानव जीवन का।इसके लिए हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए और पेड़ों की रक्षा वैसे ही करनी चाहिए जैसे हम अपने बच्चों की करते हैं।ऐसी वस्तुओं का प्रयोग कम से कम करें जो पर्यावरण के लिए हानिकारक हो जैसे विषैली गैसें पर्यावरण में ना छोड़ें प्लास्टिक का प्रयोग न करें हमें जन आंदोलन की तरह इसे लेना होगा।हमें अपने अंत:करण की आवाज में शामिल करना होगा जैसे अपने आप ही जब हम किसी धार्मिक स्थल से गुजरते हैं तो श्रद्धा भाव से हमारा सिर झुक जाता है अपने से बड़ों के सामने बिना सोचे ही हम विनम्र हो जाते हैं ।उन्होंने कहा कि हमें ऐसी आदतें विकसित करनी होगी कि पर्यावरण की सुरक्षा से संबंधित आदतें भी हमारी जीवन शैली में स्थाई स्थान बना ले।

इस अवसर पर जिला प्रचारक शिव प्रसाद,जिलाध्यक्ष भाजपा धर्मराज मौर्य,नगर प्रचारक धनंजय,गौरव,चेयरमैन सिराथू भोला यादव,हिमांशु,राजेश केशरी,सोनेलाल आदि सैकड़ों युवा सम्मिलित हुए।

Ashok Kesarwani- Editor
Author: Ashok Kesarwani- Editor