उत्तर प्रदेश: यूपी पुलिस SI भर्ती परीक्षा-2026 के पहले ही दिन एक विवादास्पद प्रश्न को लेकर बवाल,ब्राह्मण समाज ने जताया आक्रोश,डिप्टी सीएम ने दिए कार्रवाई के निर्देश,
यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आयोजित उप निरीक्षक (एसआई) नागरिक पुलिस भर्ती परीक्षा-2026 के पहले ही दिन एक विवादास्पद प्रश्न को लेकर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है।शनिवार को पहली पाली की परीक्षा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में ‘अवसर के अनुसार बदल जाने वाले’ (अवसरवादी) विकल्प के तौर पर ‘पंडित’ शब्द का प्रयोग किया गया। इसके सोशल मीडिया पर वायरल होते ही ब्राह्मण समाज में आक्रोश फैल गया, जिसके बाद डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कड़ा संज्ञान लेते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया है।

विवाद बढ़ता देख पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक ने देर रात स्पष्टीकरण जारी किया है। बोर्ड का कहना है कि प्रश्नपत्र स्थानीय स्तर पर तैयार नहीं किए जाते, बल्कि यह कार्य ‘अतिगोपनीय संस्थाओं’ (एक्सटर्नल एजेंसियां) को सौंपा जाता है। परीक्षा की शुचिता और गोपनीयता बनाए रखने के लिए बोर्ड का कोई भी अधिकारी या कर्मचारी प्रश्नपत्रों का पहले से अवलोकन नहीं करता। सील्ड पैकेट सीधे परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थियों के सामने ही खोले जाते हैं। हालांकि, बोर्ड ने माना कि यह गंभीर त्रुटि है और मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
वही इस मामले में ब्राम्हण समाज सेना कौशाम्बी के संरक्षक एडवोकेट राम प्रकाश मिश्रा ने आक्रोश जताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि बार बार ब्राह्मण समाज को टारगेट किया जा रहा है,ऐसे कई मामले सामने आए है जिनमें ब्राह्मण समाज को अपमानित करने के लिए टिप्पणी की गई है,आक्रोश जताया गया तो उन पर हल्की कार्रवाई भी नहीं की गई,ऐसे में लगता है कि सरकार की नीयत में खोट है और सरकार ही यह सब करवा रही है।
एडवोकेट राम प्रकाश मिश्रा ने यह भी कहा कि भोपाल का मामला हो अथवा पंडित फिल्म का मामला,इन मामलों में कोई भी कार्रवाई अभी तक नहीं की गई और महज माफी मांगने तक में ही मामले को दबा दिया गया है। उन्होंने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ऐसे कृत्य को बंद नहीं करती है तो ब्राम्हण समाज एक बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होगा, उन्होंने कहा कि प्रदेश में डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने इस पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है,यदि इस मामले में कड़ी कार्रवाई नहीं होती है तो शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर ब्राम्हण समाज आंदोलन करेगा।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने इस मामले पर तीखी नाराजगी जताते हुए अपने ‘एक्स’ (ट्विटर) हैंडल पर लिखा, “किसी भी प्रश्न से किसी समाज या वर्ग की गरिमा को ठेस पहुंचती है तो यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। सरकार ने इसका गंभीरता से संज्ञान लिया है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी जाति या परंपरा के प्रति अपमानजनक शब्दों के प्रयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।









