विधिक साक्षरता शिविर में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट) के बारे में किया गया जागरूक

कौशाम्बी: विधिक साक्षरता शिविर में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट) के बारे में किया गया जागरूक,

यूपी के कौशाम्बी जिले में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जनपद न्यायालय कौशाम्बी के तत्वावधान में लाल बहादुर शास्त्री इण्टर कॉलेज चायल में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णयों का व्यापक प्रचार-प्रसार, नशा मुक्त एवं बाल विवाह मुक्त भारत अभियान, शोषण के विरुद्ध अधिकार, पॉश एक्ट व बच्चो के अधिकार विषय पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।

इस साक्षरता शिविर में डॉ. नरेन्द्र दिवाकर ने शोषण के विरूद्ध अधिकार और बाल अधिकार पर बात करते हुए कहा कि बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर कई कानूनी प्रावधान हैं और उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के द्वारा भी समय-समय पर दिशा निर्देश दिये जाते हैं,लेकिन जानकारी के अभाव में बहुत से लोग उनका लाभ नहीं प्राप्त कर पाते हैं। इन कानूनों की सार्थकता तभी होगी जब इन कानूनों के बारे में जागरूकता होगी। जब आप अपने अधिकारों के प्रति सजग होंगे तो कोई भी आपका शोषण नहीं कर सकेगा।

उन्होंने बताया कि शोषण के विरुद्ध अधिकार किसी भी व्यक्ति को गुलामी और अमानवीय परिस्थितियों से बचाते हैं। शोषण के विरुद्ध अधिकार से जुड़े प्रावधान भारतीय संविधान (अनु. 23 और 24) सहित कई कानूनों में दिए गए हैं। अनैतिक व्यापार अधिनियम 1956,किशोर न्याय अधिनियम (2015), शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम (2009), बाल श्रम निषेध (संशोधन) अधिनियम (2016), और यौन अपराधों से बच्चों की सुरक्षा (POCSO) अधिनियम (2012), बंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम 1976 तथा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21A, 24, और 39 शामिल हैं, जो बच्चों को शिक्षा, शोषण से सुरक्षा प्रदान करते हैं और सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करते हैं।

पीएलवी ममता दिवाकर ने मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना, कन्या सुमंगला योजना, वृद्धापेंशन और निराश्रित महिला पेंशन योजना, दिव्यांग सहायता योजना, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा प्रदत्त सेवाओं आदि के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान किया।

मुख्य अतिथि चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल अमित कुमार मिश्र ने पॉक्सो एक्ट अर्थात यौन अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 पर बात करते हुए कहा कि यह अधिनियम जेण्डर न्यूट्रल है, इस अधिनियम में बालक शब्द के तहत लड़का और लड़की दोनों को शामिल किया गया है। इसमें गंभीर मामलों में मृत्युदंड तक की सजा का प्रावधान है।

उन्होंने पॉश एक्ट पर बात करते हुए कहा कि यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 एक तरफ यौन उत्पीड़न की शिकार पीड़िता की शिकायतों के लिए एक संरचित शिकायत निवारण तंत्र प्रदान कर कार्यस्थल पर समानता और समावेशिता को बढ़ावा देता है जिससे महिला कर्मचारियों की भागीदारी और उत्पादकता भी बढ़े तो वहीं दूसरी तरफ कंपनी/नियोक्ता को कानूनी पेंचीदगी/जटिलताओं से बचाते हुए बेहतर कार्य संस्कृति विकसित करने में मदद भी करता है।

शिविर में उपस्थित विद्यार्थियों को नशा मुक्त भारत एवं बाल विवाह मुक्त भारत बनाने की शपथ भी दिलवाई गई।कार्यक्रम का संचालन शिक्षक अजय कुमार शर्मा तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रधानाचार्य डॉ. संतोष कुमार मिश्र ने दिया।

इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. संतोष कुमार मिश्र, शिक्षक अजय कुमार शर्मा, राम प्रताप, राजेश कुमार यादव, बृजेन्द्र पाल, भूपेन्द्र हास मौर्य, आनंद दिवाकर, जयशंकर, वन्दना देवी एवं पैरा लीगल वालंटियर ममता दिवाकर, अमरदीप दिवाकर सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

 

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कौशाम्बी

Ashok Kesarwani- Editor
Author: Ashok Kesarwani- Editor