पशु क्रूरता निवारण एवं वन्यजीव संरक्षण पर आयोजित हुआ विधिक जागरूकता शिविर

कौशाम्बी: पशु क्रूरता निवारण एवं वन्यजीव संरक्षण पर आयोजित हुआ विधिक जागरूकता शिविर,

यूपी के कौशाम्बी जिले में गुरुवार को को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जनपद कौशाम्बी के तत्वावधान में गौ आश्रय स्थल ओसा, नगर पालिका परिषद मंझनपुर में पशुओं के प्रति बढ़ती क्रूरता एवं वन्यजीवों के घटते प्राकृतिक आवास पर लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से पशुक्रूरता निवारण एवं वन्य जीव संरक्षण विषय पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।

इस जागरूकता शिविर में अतिथियों द्वारा गायों को चुनरी ओढ़ाकर, गुड़ और केला खिलाकर एवं माला पहनाकर शिविर की औपचारिक शुरुआत की गई।इस शिविर में पशुओं के प्रति बढ़ती क्रूरता और वन्यजीवों के घटते प्राकृतिक आवासको लेकर चर्चा की गई।

पशु क्रूरता निवारण पर अपनी बात रखते हुए डॉ. नरेन्द्र दिवाकर ने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार पशुओं के साथ मारपीट, उन्हें भूखा-प्यासा रखना, अवैध परिवहन, अत्यधिक बोझ लादना तथा घायल पशुओं का उपचार न कराना जैसी घटनाएं सामने आती हैं। इसके अलावा मनोरंजन, अवैध व्यापार और अन्य स्वार्थों के लिए पशुओं का इस्तेमाल उनके जीवन को संकट में डालना है, ऐसा नहीं करना चाहिए।उन्होंने कहा कि पशु क्रूरता को रोकना केवल कानून का विषय नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना और पर्यावरणीय संतुलन से जुड़ा महत्वपूर्ण दायित्व है।

उन्होंने बताया कि पशु हमारे लिए बहुत लाभदायक होते हैं। पशु स्वामियों को चाहिए कि जो पशु उसके संरक्षण में है उसकी देखभाल करेगा और अनावश्यक पीड़ा पहुंचने से या किसी के द्वारा पहुंचाने से रोकें और कल्याण सुनिश्चित करें। पशुओं को बिना अनुमति मनोरंजन के लिए करतब करवाने को प्रतिबंधित किया गया है। दुधारू पशुओं से जबरन दूध निकालने के लिए कोई पदार्थ प्रयोग किए जाने पर सजा, जुर्माना और पशु की जब्ती का भी प्रावधान है। साथ ही पशु क्रूरता निवारण संबंधी विभिन्न कानूनों यथा भारतीय न्याय संहिता और भारतीय संविधान में दिए गए प्रावधानों के बारे में भी प्रकाश डाला गया।

वन दरोगा प्रेमनाथ ने वन्य जीव संरक्षण अधिनियम पर अपनी बात रखते हुए कहा कि वन्यजीवों का शिकार भी जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है। वन्य जीव हमारी पारिस्थितिकी के संतुलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं इसलिए उन्हें मारे नहीं अपितु अविलंब वन विभाग को सूचित करें।

उन्होंने बताया कि वन्यजीव संरक्षण के लिए जंगलों, जलस्रोतों और प्राकृतिक आवासों की रक्षा आवश्यक है। वनों की कटाई, अवैध शिकार, प्रदूषण और अनियोजित विकास के कारण अनेक वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास लगातार प्रभावित हो रहे हैं। इसका असर केवल पशु-पक्षियों पर ही नहीं, बल्कि मानव जीवन और जलवायु संतुलन पर भी पड़ता है।वन्यजीवों के संरक्षण के लिए विभिन्न कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 वन्यजीवों और उनके संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनी आधार प्रदान करता है।

पशु चिकित्साधिकारी डा. अनुज ने कहा कि प्रत्येक नागरिक घायल पशु को देखकर संबंधित पशु चिकित्सा सेवा, स्थानीय प्रशासन या अधिकृत पशु संरक्षण संस्था को सूचना दे सकता है। वन्यजीव मिलने पर स्वयं पकड़ने या नुकसान पहुंचाने के बजाय वन विभाग को सूचना देना अधिक सुरक्षित और उचित है।

पशु संरक्षण और वन्यजीव संरक्षण वास्तव में प्रकृति और मानवता दोनों की रक्षा का अभियान है। हम सबको इस हेतु साथ आना चाहिए।

उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी कौशाम्बी डा. राकेश कुमार ने कहा कि पशुओं पर उनकी क्षमता से अधिक भार नहीं लादना चाहिए और उनके खाने-पीने का उचित ध्यान देना चाहिए। जब पशु क्रय विक्रय करें तो यह अवश्य ध्यान रखें कि पशु चिकित्सक से पशु के फिट होने का प्रमाणपत्र अवश्य प्राप्त कर लें और वाहन में पशु को ले जाने के लिए पर्याप्त स्थान का होना जरूरी है। उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम में बिना लाइसेंस गोमांस (बीफ) या गोमांस उत्पादों की बिक्री, परिवहन और प्रदर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध का प्रावधान है।आम जन मानस को चाहिए कि अपने पशुओं का ख्याल रखें और दूध न निकलने पर उन्हें त्यागें नहीं अपितु उसे घर में रखकर ही खिलाएं पिलाएं। पशुओं की उचित देखभाल से पशुपालक को अधिक आर्थिक लाभ व मानसिक संतोष मिलता है।यदि किसी को गोवंश पालना है तो वह गो आश्रय स्थल से गोवंश ले भी जा सकते हैं।

शिविर को एडीओ समाज कल्याण मंझनपुर मो. अशरफ़ अंसारी, सखी वन स्टॉप सेंटर से प्रबंधक शशि त्रिपाठी और नागेश्वर प्रसाद ने भी संबोधित किया। शिविर का संचालन संजय कुमार ने तथा धन्यवाद ज्ञापन पीएलवी मनीषा दिवाकर ने किया।

 

शिविर में संजय कुमार गुप्ता, दिनेश कुमार, रूपेश कुमार, राकेश कुमार, हीरा लाल, शिव कुमार, अमर कुमार, आजाद भगत सिंह, नरेश कुमार, अजय कुमार, नोखेलाल व अन्य लोग मौजूद रहे।

Ashok Kesarwani- Editor
Author: Ashok Kesarwani- Editor