श्रीअन्न एफ.पी.ओ. सदस्यों का दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का किया गया शुभारम्भ

कौशाम्बी: श्रीअन्न एफ.पी.ओ. सदस्यों का दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का किया गया शुभारम्भ,

यूपी के कौशाम्बी जिले में श्री-अन्न (मिलेट्स) कार्यक्रम के अन्तर्गत एफ.पी.ओ. (किसान उत्पादक संगठन) के सदस्यों का दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ डॉ.अमित कुमार केसरी की उपस्थिति में कृषि विज्ञान केन्द्र, मंझनपुर में किया गया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य एफ.पी.ओ. सदस्यों को श्री अन्न की वैज्ञानिक खेती, उत्पादन तकनीक, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं विपणन के संबंध में तकनीकी एवं व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना है।

डॉ. केसरी ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि श्री अन्न पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ-साथ कम पानी एवं अपेक्षाकृत कम लागत में उत्पादित होने वाली महत्वपूर्ण फसलें हैं। बदलते जलवायु परिदृश्य में ज्वार, बाजरा, रागी, कोदो, कुटकी, सांवा आदि मिलेट्स की खेती किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बन सकती है। उन्होंने एफ.पी.ओ. के माध्यम से श्री अन्न के उत्पादन को बाजार से जोडने तथा किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने पर विशेष जोर दिया।

कृषि वैज्ञानिक डॉ. अजय ने श्री अन्न का महत्व, प्रमुख मिल्लेट्स फसलों की पहचान एवं उत्पादन तकनीक के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होने श्री अन्न की भूमि की तैयारी, उन्नत किस्मों का चयन, बीज की मात्रा, बुवाई का उचित समय एवं विधि, पोषक तत्व प्रबंधन, सिंचाई तथा खरपतवार प्रबंधन से संबंधित वैज्ञानिक जानकारी प्रदान की। डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने एफ.पी.ओ. की भूमिका एवं श्री अन्न आधारित व्यवसायिक गतिविधियों पर चर्चा की। उन्होंने प्रतिभागियों को सामूहिक रूप से बीज एवं कृषि आदानों की खरीद, उपज का संग्रहण, प्राथमिक प्रसंस्करण तथा सामूहिक विपणन के लाभों से अवगत कराया गया। बताया कि एफ.पी.ओ. किसानों को उत्पादन से लेकर बाजार तक एक संगठित मूल्य श्रृंखला से जोडने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

प्रशिक्षण को सहभागी एवं व्यावहारिक बनाने के लिए समूह चर्चा, प्रश्नोत्तर एवं अनुभव साझा करने की गतिविधियाँ भी आयोजित की गईं। एफ.पी.ओ. सदस्यों ने श्री अन्न उत्पादन, विपणन, प्रसंस्करण एवं मूल्य निर्धारण से संबंधित अपनी समस्याएँ एवं अनुभव साझा किए, जिनका विशेषज्ञों द्वारा समाधान बताया गया।

Ashok Kesarwani- Editor
Author: Ashok Kesarwani- Editor