जिला कारागार में नशा मुक्त समाज के निर्माण हेतु आयोजित हुआ विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर

कौशाम्बी: जिला कारागार में नशा मुक्त समाज के निर्माण हेतु आयोजित हुआ विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर,

यूपी के कौशाम्बी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में जिला कारागार में नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के विरुद्ध विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर जेल अधीक्षक अजितेश मिश्रा ने जेल में बंद बंदियों को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों तथा इनके अवैध व्यापार से होने वाली सामाजिक, आर्थिक एवं स्वास्थ्य संबंधी हानियों के प्रति जागरूक किया तथा यह भी कहा कि अगर आपको कोई नशे का सेवन करने के लिए कहे तो आप तुरंत वहां से हट कर अपने आप को उनसे अलग कर लेना चाहिए और किसी अन्य कार्य जैसे पढ़ाई, खेलकूद, घर का कार्य, पानी पीना आदि कार्य में जुट जाना चाहिए,जिससे आपकी नशा करने की लत भी छूट जाएगी और आप कार्य भी पूरा हो जाएगा।

जेल प्रशासन ने बंदियों से अपील की कि यदि कहीं भी नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार या तस्करी की जानकारी मिले तो इसकी सूचना तत्काल संबंधित विभाग या पुलिस को दें, ताकि समाज को नशामुक्त बनाने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

चीफ लीगल एंड डिफेंस काउंसिल अमित मिश्रा ने कहा कि नशा व्यक्ति, परिवार और समाज—तीनों के लिए घातक है। युवाओं को नशे से दूर रखते हुए शिक्षा, खेल, कौशल विकास और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। सभी बंदियों से नशा मुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय सहयोग देने का आह्वान किया गया। और कहा कि नशे पर अत्यधिक खर्च होने से आर्थिक स्थिति खराब होती है, कर्ज बढ़ सकता है और रोजगार प्रभावित हो सकता है।

नशे से शिक्षा एवं करियर पर असर पड़ता है, विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है, जबकि नौकरीपेशा लोगों की कार्यक्षमता घटती है और नौकरी जाने का खतरा बढ़ जाता है।नशे की लत चोरी, हिंसा, सड़क दुर्घटनाओं और अन्य अपराधों की संभावना बढ़ा सकती है।व्यक्ति का समाज में सम्मान कम होता है और सामाजिक संबंध कमजोर पड़ जाते हैं।नशे की लत की वजह से युवाओं की प्रतिभा, शिक्षा, करियर और जीवन के लक्ष्यों को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचा सकती है।

पी एल वी अमरदीप दिवाकर ने अपनी बात रखते हुए कहा कि नियमित नशे के सेवन की वजह से आपके स्वास्थ्य पर इसका बुरा दुष्प्रभाव पड़ सकता है जैसे – हृदय, फेफड़े, लीवर, किडनी और मस्तिष्क को गंभीर नुकसान हो सकता है। मानसिक रोग, अवसाद और चिंता जैसी समस्याएँ भी बढ़ती हैं। याददाश्त कमजोर होना, निर्णय लेने की क्षमता घटना, चिड़चिड़ापन, तनाव और आत्महत्या का जोखिम बढ़ सकता है।साथ ही पारिवारिक समस्याएँ जैसे परिवार में विवाद, घरेलू हिंसा, विश्वास की कमी और रिश्तों में टूटन आ सकती है। और परिवार को समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है।इसलिए नशा जीवन नहीं, विनाश का रास्ता है, स्वस्थ और सफल जीवन के लिए नशे से दूर रहें तथा दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करें।

इस अवसर पर उपस्थित सभी बंदियों को नशीले पदार्थों के सेवन से दूर रहने तथा नशा मुक्त भारत बनाने की शपथ भी दिलवाई गई।कार्यक्रम का संचालन पी एल वी अमरदीप दिवाकर ने तथा धन्यवाद ज्ञापन पी एल वी निलेश कुमार ने दिया।

इस अवसर पर जेल अधीक्षक अजितेश मिश्रा, चीफ लीगल एंड डिफेंस काउंसिल अमित मिश्रा, जेलर राजेश राय, डिप्टी जेलर चंद्रावती, कुंती दोहरे सदानंद सिंह एवं पैरा लीगल वालंटियर अमरदीप दिवाकर एवं निलेश कुमार सहित समस्त बंदी मौजूद रहे।

 

 

Ashok Kesarwani- Editor
Author: Ashok Kesarwani- Editor