विभाजन विभीषिका में लाखों लोगों ने गंवाई जान, डेढ़ करोड़ लोग हुए विस्थापित; यह दुनिया की सबसे बड़ी विभाजन त्रासदियों में से एक : डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’

कौशाम्बी: विभाजन विभीषिका में लाखों लोगों ने गंवाई जान, डेढ़ करोड़ लोग हुए विस्थापित; यह दुनिया की सबसे बड़ी विभाजन त्रासदियों में से एक : डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’,

यूपी के कौशाम्बी जिले में राज्यमंत्री (स्वतन्त्र प्रभार) आयुष विभाग, उ0प्र0 डाॅ. दयाशंकर मिश्र “दयालु” ने शुक्रवार को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर उदयन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि 50 से 60 वर्ष इस बात को छिपाकर रखा गया , देश नहीं जान पाया कि आजादी 15 अगस्त, 1947 को मिली थी, उसके पहली रात्रि को क्या हुआ था। देश का बटवारा हुआ, अखण्ड भारत का बटवारा किया गया। इस विभाजन विभीषिका में 06 लाख से लेकर 10 लाख लोगों तक की हत्याएं हुई। डेढ़ करोड़ लोग विस्थापित हुए। यह दुनियाॅ की सबसे बड़ी विभाजन त्रासदी थी। ट्रेनों में लाशें भरकर आती थी। सत्ता पाने की लालच में देश का विभाजन हुआ।

राज्यमंत्री (स्वतन्त्र प्रभार) ने कहा कि डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश के विभाजन का विरोध करते हुए नेहरू मन्त्रिमण्डल से त्याग-पत्र दिया था। देश के विभाजन का सर्वाधिक दंश, उस समय के सबसे बड़े सूबा पंजाब एवं बंगाल ने झेला, जो वर्तमान बंगाल बचा हुआ है, वह डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के संघर्ष के कारण ही बचा, वरना पूरा बंगाल पाकिस्तान (वर्तमान बाग्लादेश) में शामिल कर दिया गया था। पंजाब की पाॅचों नदियों का जल बाटना पड़ा, इन नदियों के कारण ही पंजाब की भूमि सबसे उपजाऊ भूमि मानी जाती थी। तक्षशिला विश्वविद्यालय एवं सिंधु घाटी सभ्यता पाकिस्तान में चला गया। सिंधु घाटी सभ्यता, भारतीय सभ्यता थी। सिख एवं जैन धर्म के प्राचीन मन्दिर/गुरूद्वारा पाकिस्तान में चला गया। देश ने विभाजन के कारण बहुत कुछ खोया है। विभाजन के कारण लोगों ने अपने घर, व्यापार, मकान एवं सम्पत्ति छोड़कर आएं, यहाॅ पर शरणार्थी शिविरों में रहना पड़ा, इन स्वाभिमानी लोंगो ने यहाॅ पर आकर शून्य से छोटे-छोटे कार्य कर नए जीवन की शुरूआत की। उन्होंनेे कहा कि विभाजन विभीषिका में असंख्य लोग बलिदान हुए। उन्होंने कहा कि हम लोग देश के आतीत को जानेंगे, तभी वर्तमान पर गौरव करेंगे, कि हमें आजादी कैसें मिली थी। उन्होंने कहा कि मा0 प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में आज देश की सीमाएं सुरक्षित हैं।

अध्यक्ष, जिला पंचायत कल्पना सोनकर ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि विभाजन विभीषिका बहुत बड़ी त्रासदी थी, विभाजन विभीषिका को याद करना किसी समुदाय के प्रति द्वेष पैदा करना नहीं है, बल्कि इतिहास की त्रासदी से सबक लेकर ऐसा भविष्य बनाना है, जिसमें मानवता, शान्ती और आपसी सम्मान सर्वोपरि होगा, यही उन सभी पीड़ितों के प्रति सच्ची श्रद्धांन्जलि होगी, जिनकी पीड़ा ने इतिहास के लिए हमेशा के लिए बदल दिया।

सदस्य, राज्य महिला आयोग प्रतिभा कुशवाहा ने कहा कि विभाजन विभीषिका बहुत बड़ी त्रासदी थी। बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर-बार छोड़कर पलायन करना पड़ा। लोगों को हिंसा और भय का सामना करना पड़ा। परिवार बिछड़ गए, सम्पत्ति और आजीविका छूट गई। उन्होंने कहा कि विभाजन केवल देश की सीमाओं का बटवारा नहीं था, बल्कि यह करोड़ों के जीवन और भावनाओं को झकझोर देने वाली मानवीय त्रासदी थी।

कार्यक्रम में विभाजन के दौरान अपने प्राण गंवाने वाले एवं विस्थापन का दंश झेलने वाले लोगों की स्मृति में 02 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

इस अवसर पर डीएम डाॅ. अमित पाल, एसपी सत्यनारायण एवं सीडीओ विनोद राम त्रिपाठी एवं राज्यमंत्री (स्वतन्त्र प्रभार) के जनसंपर्क अधिकारी गौरव राठी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहें।

Ashok Kesarwani- Editor
Author: Ashok Kesarwani- Editor