भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे लेखपाल को उसी क्षेत्र में मिल गई प्रभारी कानूनगो की जिम्मेदारी,राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

कौशाम्बी: भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे लेखपाल को उसी क्षेत्र में मिल गई प्रभारी कानूनगो की जिम्मेदारी,राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल,

यूपी के कौशाम्बी जिले के चायल तहसील क्षेत्र में लेखपाल के पद पर तैनात रहे पवन कुमार राय को लेकर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली फिर एक बार सवालों के घेरे में है। फरवरी 2026 में वरासत से जुड़े एक मामले में कथित तौर पर रिश्वत मांगने और अभद्र भाषा का प्रयोग करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। मामले के सामने आने के बाद डीएम के हस्तक्षेप पर तत्कालीन एसडीएम चायल द्वारा पवन कुमार राय के निलंबन की कार्रवाई की गई थी।

हालांकि, इस पूरे प्रकरण में अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि रिश्वत मांगने के कथित वायरल वीडियो को लेकर क्या विभागीय स्तर पर स्वतंत्र जांच कराई गई? आरोप है कि संबंधित कर्मचारी के खिलाफ रिश्वत मांगने के मामले को कार्रवाई को आधार न बनाकर धारा-80 से जुड़े एक मामले में निलंबन की कार्रवाई की गई।

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स्थानीय लोगों का आरोप है कि वरासत समेत राजस्व संबंधी कार्यों के नाम पर उनसे पैसों की मांग की गई और अभद्र व्यवहार किया गया। इन आरोपों के बावजूद उसी क्षेत्र में पवन कुमार राय को प्रभारी कानूनगो की जिम्मेदारी दिए जाने से राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि संबंधित कर्मचारी के खिलाफ शिकायत और आरोपों की जांच लंबित थी, तो उन्हें महत्वपूर्ण राजस्व जिम्मेदारी सौंपने का आधार क्या रहा? क्या प्रभारी कानूनगो की जिम्मेदारी दिए जाने से पहले उनके खिलाफ पूर्व में हुई कार्रवाई और शिकायतों का विभागीय स्तर पर परीक्षण किया गया?

प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने का दावा करती है। ऐसे में कौशाम्बी के इस मामले में स्थानीय लोगों की मांग है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि पवन कुमार राय को प्रभारी कानूनगो की जिम्मेदारी किन परिस्थितियों में दी गई।

Ashok Kesarwani- Editor
Author: Ashok Kesarwani- Editor