कौशाम्बी: वैदिक शिक्षा समिति की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में,रजिस्ट्रार ने 15 बिंदुओं पर मांगा जवाब,
यूपी के कौशाम्बी जिले के सिराथू स्थित वैदिक शिक्षा समिति की कार्यप्रणाली इन दिनों सवालों के घेरे में है। रमेश चन्द्र व अन्य द्वारा आयुक्त, प्रयागराज मंडल के समक्ष दी गई शिकायत के बाद सहायक रजिस्ट्रार, फर्म्स, सोसाइटीज एंड चिट्स, प्रयागराज कार्यालय ने सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम 1860 की धारा 22 के अंतर्गत समिति को कड़ा पत्र (पत्रांक 1768/आई-8838/2026-27, 10 अगस्त 2026) जारी किया है।
पत्र में समिति से गठन से लेकर अद्यतन तक के समस्त अभिलेख, कार्यवाही रजिस्टर, सदस्यता रजिस्टर, बैंक पासबुक, ऑडिटेड बैलेंस शीट, फिक्स्ड एसेट्स रजिस्टर तथा भवन निर्माण एवं मरम्मत में हुए व्यय का पूरा ब्योरा 25 अगस्त 2026 तक प्रस्तुत करने को कहा गया है।
सबसे अहम बिंदु यह है कि रजिस्ट्रार कार्यालय ने सीधे तौर पर पूछा है कि क्या समिति द्वारा विगत वर्षों में लाभ अर्जित किया जा रहा है, जो सोसाइटी के पंजीकृत उद्देश्यों तथा अधिनियम की धारा-1 के विपरीत बताया जा रहा है। इसके अतिरिक्त समिति की चल-अचल संपत्ति की बिक्री को लेकर भी स्पष्टीकरण तलब किया गया है, यानी संपत्ति कब और किन परिस्थितियों में बेची गई, इसका साक्ष्य सहित विवरण देना होगा।
वही सांसद व विधायक निधि तथा केंद्र व राज्य सरकार से प्राप्त अनुदान एवं विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम के अंतर्गत मिली धनराशि के विशेष ऑडिट का भी आदेश दिया गया है, जिससे सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता की जांच हो सकेगी।
साथ ही न्यायालय में लंबित वादों तथा किसी अन्य ट्रस्ट या सोसाइटी से वित्तीय लेन-देन का विवरण भी मांगा गया है। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि यदि समिति निर्धारित समय-सीमा में संतोषजनक अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर पाती, तो यह मामला आगे बढ़कर पंजीकरण निरस्तीकरण जैसी कार्रवाई तक जा सकता है।








