कौशाम्बी: संत शिरोमणि गुरु रविदास जी ने जाति,ऊंच नीच और भेदभाव का विरोध करते हुए सभी मनुष्यों को समान माना- धर्मराज मौर्य,
यूपी के कौशाम्बी जिले के विधानसभा मंझनपुर के सांगठनिक मण्डल सरसवां के ग्राम पंचायत अन्धावा में संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास जी महाराज की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में भाजपा द्वारा चलाए जा रहे समरसता संकल्प अभियान के तहत जिलाध्यक्ष धर्मराज मौर्य ने पार्टी कार्यकताओं के साथ कलश पूजन कर भव्य स्वागत किया।
कलश रथ यात्रा का जिलाध्यक्ष धर्मराज मौर्य ने स्वागत कर पूजन करते हुए उनके विचारों को बताते हुए कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास जी महाराज भारतीय संत परंपरा के ऐसे महान समाज सुधारक थे,जिन्होंने अपने जीवन और वाणी के माध्यम से जाति-पाति,ऊंच-नीच,भेदभाव और सामाजिक विषमता के विरुद्ध मजबूत संदेश दिया। उनका दर्शन केवल आध्यात्मिक चेतना तक सीमित नहीं था,बल्कि एक ऐसे समाज की कल्पना करता था जिसमें प्रत्येक व्यक्ति को समान सम्मान,अवसर और गरिमा प्राप्त हो।सामाजिक समरसता गुरु रविदास जी के चिंतन का महत्वपूर्ण आधार था।
उन्होंने बताया कि उनका मानना था कि मनुष्य की श्रेष्ठता उसके जन्म,जाति या सामाजिक स्थिति से नहीं,बल्कि उसके कर्म,आचरण और मानवीय गुणों से होती है। उन्होंने समाज को आपसी भेदभाव समाप्त कर प्रेम,भाईचारे और सद्भाव के साथ रहने का संदेश दिया।समानता के विषय में उनका चिंतन अत्यंत व्यापक था। उन्होंने उस समय समाज में व्याप्त छुआछूत और ऊंच-नीच की मानसिकता को चुनौती दी। उनकी वाणी में मनुष्य की मूल समानता और आत्मसम्मान की भावना स्पष्ट दिखाई देती है। उनका संदेश था कि ईश्वर की दृष्टि में सभी मनुष्य समान हैं,इसलिए समाज में भी किसी व्यक्ति के साथ जन्म या जाति के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए।मानवता उनके जीवन-दर्शन का केंद्र थी।
संत गुरु रविदास जी ने प्रेम,करुणा,सेवा,सदाचार और परोपकार को सच्चे जीवन का आधार माना। उन्होंने मनुष्य को मनुष्य से जोड़ने वाली संवेदनाओं को महत्व दिया और ऐसी सामाजिक व्यवस्था की कल्पना की जिसमें किसी को अपमान,अन्याय या भेदभाव का सामना न करना पड़े।गुरु रविदास जी ने अपने विचारों के माध्यम से उस सामाजिक व्यवस्था को चुनौती दी,जिसमें मनुष्य का मूल्य उसके जन्म और जाति के आधार पर निर्धारित किया जाता था। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि मनुष्य की पहचान उसकी जाति से नहीं,बल्कि उसके कर्म,चरित्र और सद्गुणों से होती है। उनके लिए प्रत्येक व्यक्ति सम्मान और गरिमा का अधिकारी था।सामाजिक समरसता उनके चिंतन की आत्मा थी। वे चाहते थे कि समाज में किसी प्रकार का भेदभाव न हो और सभी लोग एक-दूसरे के सुख-दुःख में सहभागी बनें। उनका संदेश समाज को बांटने वाली मानसिकताओं के स्थान पर प्रेम,सहयोग,भाईचारे और परस्पर सम्मान को स्थापित करने का था।
इस मौके पर अभियान संयोजक व जिला उपाध्यक्ष भूपेंद्र पटेल,सह संयोजक व जिला उपाध्यक्ष नितिन पासी,मण्डल अध्यक्ष प्रमोद भार्गव,अजय पाण्डेय,नरेंद्र पटेल,पूर्व विधायक मंझनपुर लाल बहादुर,ब्लॉक प्रमुख अमर सिंह,प्रतिनिधि अकबर सिंह,महिला मोर्चा संयोजक नीतू कनौजिया सहित पदाधिकारी,कार्यकर्ता,श्रद्धालुजन उपस्थित रहें।








