प्रयागराज: कनकधारा संस्था की लोक संगीत कार्यशाला का दूसरा दिन: कजरी की विभिन्न विधाओं को सीखकर झूमे प्रतिभागी प्रयागराज,
यूपी के प्रयागराज में कनकधारा संस्था द्वारा आयोजित लोक संगीत कार्यशाला के दूसरे दिन प्रतिभागियों का उत्साह और जज्बा देखते ही बना। कार्यशाला के द्वितीय दिवस में सभी आयु वर्ग के प्रतिभागियों ने पूरे जोश-शोर के साथ हिस्सा लिया। सोमवार को दूसरे दिन प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्रतिभागियों को कजरी की तीन प्रमुख विधाओं—ढुनमुनिया, चउलर और मिर्जापुरी कजरी का गहन प्रशिक्षण दिया गया।
इस कार्यशाला की सबसे खूबसूरत बात यह रही कि इसमें संगीत सीखने की कोई उम्र सीमा आड़े नहीं आई। कार्यशाला में छोटे बच्चों से लेकर 60 और 70 वर्ष तक की बुजुर्ग महिलाओं ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया और सुर से सुर मिलाया। बुजुर्ग महिलाओं का यह जोश और जज्बा वहां मौजूद सभी लोगों के लिए प्रेरणादायी रहा। कार्यशाला में पुरुषों ने भी बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी दर्ज कराई।विभिन्न प्रोफेशनल्स ने समय निकालकर दिखाई लोक कला के प्रति निष्ठालोक संस्कृति के प्रति यह दीवानगी इस कदर देखने को मिली कि कई कामकाजी महिलाएं अपनी व्यस्त दिनचर्या और नौकरी से छुट्टी लेकर तथा समय का प्रबंधन (Time Management) करके कार्यशाला में पहुँच रही हैं। प्रतिभागियों में सीएमपी डिग्री कॉलेज की संस्कृत विषय की प्राचार्या और बैंक मैनेजर समेत समाज के अलग-अलग प्रतिष्ठित प्रोफेशन से जुड़े लोग शामिल हैं, जो अपनी व्यस्तता के बावजूद लोक संगीत के संरक्षण के लिए समय निकाल रहे हैं।
अनुभवी प्रशिक्षिका आश्रया द्विवेदी के द्वारा दिए गए बेहतरीन प्रशिक्षण से सभी प्रतिभागी बेहद कम समय में बहुत ही सुरीला और सुंदर गायन कर रहे हैं। उन्हें उतनी ही खूबसूरती और बारीकी के साथ सिखाने का कार्य जानी-मानी लोक गायिका आश्रया द्विवेदी कर रही हैं। वे प्रतिभागियों को कजरी की लोक विधाओं के हर पहलू से रूबरू करा रही हैं।
कनकधारा संस्था की अध्यक्ष स्वाति निरखी (जो स्वयं एक उत्कृष्ट लोक गायिका हैं और लोक संगीत के उत्थान के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं) ने यह जानकारी देते हुए बताया कि संस्था का उद्देश्य अपनी समृद्ध लोक कला और कजरी जैसी लुप्तप्राय होती विधाओं को जन-जन तक पहुँचाना और नई पीढ़ी को इससे जोड़ना है। कार्यशाला का दूसरा दिन बेहद सफल और ऊर्जा से भरपूर रहा।








