मनोवैज्ञानिक,शारीरिक तथा सामाजिक नुकसान का कारण बन सकता है मादक पदार्थों का सेवन- डॉ. दिवाकर

कौशाम्बी: मनोवैज्ञानिक,शारीरिक तथा सामाजिक नुकसान का कारण बन सकता है मादक पदार्थों का सेवन- डॉ. दिवाकर,

यूपी के कौशाम्बी जिले के ब्रह्मचारी जी महराज इंटर कॉलेज सेवथा, तिल्हापुर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जनपद कौशाम्बी के तत्वावधान में आपदा पीड़ितों, दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार एवं मादक द्रव्यों के दुरुपयोग एवं उन्मूलन विषय पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।

शिविर की शुरूआत करते हुए डॉ. नरेन्द्र दिवाकर ने कहा कि प्राकृतिक एवं मानव-निर्मित आपदाओं के पीड़ित व्यक्ति एवं परिवार, जिनमें वे लोग शामिल हैं जिन्होंने बाढ़, भूकंप, सूखा, औद्योगिक दुर्घटनाओं, जातीय हिंसा अथवा अन्य समान आपदाओं के कारण जीवन, आजीविका, संपत्ति, आवास की हानि झेली हो या जो ऐसी आपदाओं के परिणामस्वरूप अनुचित अभाव की परिस्थितियों में आ गए हों उनके लिए आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के तहत आपदा पीड़ितों के कई अधिकार तय किए गए हैं साथ ही निःशुल्क विधिक सेवाएं, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के जरिए पीड़ितों को मुफ्त कानूनी सलाह और सहायता मिलती है।

आपदा के बाद राहत सामग्री, बीमा का लाभ, और आर्थिक मुआवजा पाने का अधिकार है और बेघर हुए लोगों को आवास पुनर्निर्माण और सुरक्षित स्थानों पर बसाने में सहायता मिलती है।

घायलों के लिए चिकित्सीय सेवाएँ और मानसिक परामर्श का प्रावधान है। महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की सुरक्षा के लिए विशेष देखभाल को प्राथमिकता दी जाती है।

इस अवसर पर दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों के संबंध में जानकारी देते हुए डॉ. नरेन्द्र दिवाकर ने बताया कि दिव्यांगजनों को समानता, गरिमा, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा तथा सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने का अधिकार है। उन्हें किसी भी प्रकार के भेदभाव से संरक्षण प्राप्त है। दिव्यांग जनों के लिए दिव्यांग जन अधिकार अधिनियम 2016 भी बनाया गया है। प्रत्येक दिव्यांग बच्चे को 6-18 वर्ष तक के बच्चे को निःशुल्क समावेशी शिक्षा, रोजगार के क्षेत्र में किसी भी प्रकार के भेदभाव पर प्रतिबंध तथा उच्च शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान है। भारत में विकलांग (दिव्यांग) व्यक्तियों के अधिकार मुख्य रूप से दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 द्वारा सुरक्षित और सुनिश्चित किए जाते हैं, जो पुराने 1995 के अधिनियम की जगह लेता है।

उन्होंने बताया कि 6 से 18 वर्ष तक के प्रत्येक दिव्यांग बच्चे को मुफ्त और समावेशी शिक्षा पाने का अधिकार है। उच्च शिक्षा संस्थानों और सरकारी नौकरियों में दिव्यांगजनों के लिए आरक्षण का प्रावधान है। रोजगार के क्षेत्र में किसी भी प्रकार का भेदभाव प्रतिबंधित है।समान अवसर और सुगम्यता ले तहत सार्वजनिक स्थलों, परिवहन, इमारतों और डिजिटल सामग्री तक दिव्यांगों की आसान पहुंच सुनिश्चित करना सभी संस्थानों की कानूनी जिम्मेदारी है।साथ ही दिव्यांगों को किफायती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं, मुफ्त सहायक उपकरण, और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ पाने का अधिकार है।

उन्होंने बताया कि पात्र दिव्यांगजन विधिक सहायता के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय से या तहसील में कार्यरत पीएलवी से संपर्क कर सकते हैं।

शिविर में मादक द्रव्यों के दुरुपयोग एवं नशे की लत से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में भी लोगों को जागरूक किया गया। बताया गया कि नशीले पदार्थों का सेवन व्यक्ति के स्वास्थ्य, परिवार, आर्थिक स्थिति एवं सामाजिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है और मनोवैज्ञानिक, शारीरिक तथा सामाजिक नुकसान का कारण बन सकता है।युवाओं को नशे से दूर रहने तथा नशे की समस्या से प्रभावित व्यक्तियों को उचित उपचार एवं पुनर्वास सेवाओं से जोड़ने के लिए प्रेरित किया गया।

एडीओ समाज कल्याण गजराज सिंह द्वारा बच्चों को मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना, राष्ट्रीय वृद्धा पेंशन योजना, छात्रों के लिए पूर्वदशम एवं दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना, शादी अनुदान योजना (अनुसूचित जाति/सामान्य वर्ग), माता पिता के लिए भरण भोषण योजना की विस्तृत जानकारी दी एवं लगने वाले डाक्यूमेंट के बारे में भी बताया ताकि ज्यादा लोगों को लाभ मिल सके।

पीएलवी ममता दिवाकर के द्वारा बच्चों को बाल विवाह की रोकथाम, स्थाई लोक अदालत की उपयोगिता किस तरह से लोक अदालत और स्थाई लोक अदालतें काम करती है? किस तरह के वाद विवाद एवं किन मामलों का निपटारा किया जाता है? उसकी विस्तृत जानकारी दी गई एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित योजनाएं एवं महिला एवं बाल कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजनाएं जैसे मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना, स्पॉन्सरशिप योजना, कन्या सुमंगला योजना, निशुल्क अधिवक्ता प्रदान किए जाने संबंधित योजनाओं की जानकारी बच्चों को दी एवं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण हेल्प लाइन 15100, वीमेन हेल्पलाइन नंबर 181, चाइल्ड लाइन नंबर 1098, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1076, 14446 राष्ट्रीय नशा मुक्त हेल्प लाइन नंबर आदि की जानकारी दी।

कार्यक्रम का संचालन पीएलवी अमरदीप दिवाकर द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन विद्यालय के प्रधानाचार्य नारायण प्रसाद शुक्ला ने दिया।

इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक वेद प्रकाश साहू, फूलचंद्र दिवाकर, गजेंद्र सिंह, पीएलवी अर्चना पाल सहित विद्यालय के तमाम शिक्षक गण एवं सैकड़ों की संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

Ashok Kesarwani- Editor
Author: Ashok Kesarwani- Editor