कौशाम्बी: पॉक्सो अधिनियम बच्चों की सुरक्षा एवं संरक्षण का मजबूत कानूनी कवच: अमित मालवीय,
यूपी के कौशाम्बी जिले में उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के तत्वावधान में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कौशाम्बी द्वारा पॉक्सो अधिनियम, 2012 के प्रावधानों के प्रति विद्यार्थियों को जागरूक एवं संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे विशेष जागरूकता अभियान के अंतर्गत राजकीय बालिका इण्टर कॉलेज, सिराथू कौशाम्बी में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर आयोजित किया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कौशाम्बी द्वारा यह विशेष जागरूकता अभियान 25 सितम्बर 2026 से 01 अक्टूबर 2026 तक प्रथम चरण तथा 02 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती के अवसर पर द्वितीय चरण में आयोजित किया जा रहा है।
कार्यक्रम में छात्राओं को भारतीय संविधान के अंतर्गत बालकों एवं महिलाओं की सुरक्षा हेतु वर्णित प्रावधान, भारतीय न्याय संहिता (पूर्व में भारतीय दण्ड संहिता 1860) और अनैतिक व्यापार (प्रतिषेध) अधिनियम 1956, पॉक्सो अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों, बालिकाओं की सुरक्षा, लैंगिक अपराधों की पहचान, पीड़ित बच्चों के अधिकार तथा अपराध की स्थिति में उपलब्ध कानूनी सहायता एवं शिकायत की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का प्रमुख संदेश रहा “18 साल से कम उम्र में सहमति सिर्फ एक भ्रम है, इसके खिलाफ सख्त कार्यवाही पॉक्सो का नियम है।”
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अमित मालवीय, विशेष न्यायाधीश एस.सी./एस.टी., जनपद न्यायालय कौशाम्बी ने कहा कि बच्चों के विरुद्ध लैंगिक अपराध अत्यंत गंभीर अपराध हैं। पॉक्सो अधिनियम बच्चों को लैंगिक अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने वाला महत्वपूर्ण कानून है। उन्होंने छात्राओं से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने तथा किसी भी अप्रिय घटना की जानकारी तत्काल अभिभावकों, शिक्षकों अथवा संबंधित सक्षम प्राधिकारी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय को देने का आह्वान किया।
अधिकार मित्र डॉ. नरेन्द्र दिवाकर ने छात्राओं को बाल अधिकार, सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श, लैंगिक अपराधों से बचाव तथा संकट की स्थिति में उपलब्ध सहायता के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल कानून की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार, विद्यालय और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने छात्राओं को किसी भी प्रकार के डर, दबाव या प्रलोभन में आकर घटना को छिपाने के बजाय तत्काल विश्वसनीय व्यक्ति से साझा करने के लिए प्रेरित किया। यह कानून जेंडर-न्यूट्रल है अर्थात बालक, बालिका और तृतीय लिंग भी इस अधिनियम के तहत संरक्षण पाने के हकदार हैं।बच्चे की सहमति या रजामंदी का कानून में कोई महत्व नहीं होता है और न ही इस आधार पर आरोपी को फायदा मिल सकता है।
चीफ लीगल एंड डिफेंस काउंसिल, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अमित कुमार मिश्र ‘एडवोकेट’ ने पॉक्सो अधिनियम के प्रमुख कानूनी प्रावधानों तथा पीड़ित बच्चों को उपलब्ध विधिक सहायता के बारे में विस्तार से बताया। यह अधिनियम बच्चों को शारीरिक, भावनात्मक या यौन शोषण से बचाने और हर स्तर पर उनके हितों की रक्षा करने के उद्देश्य से बनाया गया है। उन्होंने कहा कि कानून बच्चों के हितों और गरिमा की रक्षा के लिए प्रभावी प्रावधान उपलब्ध कराता है तथा जरूरतमंदों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से हर चरण पर निःशुल्क विधिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है।
इस अवसर पर छात्राओं को आपात स्थिति में सहायता प्राप्त करने के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 (टोल फ्री) तथा नालसा हेल्पलाइन नंबर 15100 (टोल फ्री) की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का संचालन नोडल शिक्षिका नीलम कुमारी ने किया। प्रधानाचार्या पुष्पा देवी ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि छात्राओं को उनके कानूनी अधिकारों एवं सुरक्षा उपायों की जानकारी देना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि एवं अतिथियों ने छात्राओं से संवाद किया तथा पॉक्सो अधिनियम से संबंधित उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया।
इस अवसर पर प्रधानाचार्य पुष्पा देवी, आरक्षी आशीष यादव, उपनिरीक्षक लक्ष्मी सिंह,शिक्षिकाएं श्रद्धा मिश्रा, नीलम कुमारी, मंजू कुमारी, विद्यालय स्टाफ सहित बड़ी संख्या में छात्राएं मौजूद रहीं।








