विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर चिकित्सकों ने दिया संदेश—मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी न करें, समय पर परामर्श और उपचार से संभव है बेहतर जीवन

कौशाम्बी: विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर चिकित्सकों ने दिया संदेश—मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी न करें, समय पर परामर्श और उपचार से संभव है बेहतर जीवन,

यूपी के कौशाम्बी जिले में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, तनाव प्रबंधन, मानसिक विकारों की समय पर पहचान तथा उपलब्ध उपचार एवं परामर्श सेवाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। चिकित्सकों ने कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी समान प्राथमिकता देना आवश्यक है।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. हरिओम कुमार सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में व्यस्त दिनचर्या, कार्य का दबाव और मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। तनावमुक्त एवं संतुलित जीवन के लिए योग, ध्यान, नियमित शारीरिक व्यायाम, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद को दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पंकज तिवारी ने कहा कि मानसिक तनाव को कम करने में परिवार, मित्रों और समाज का सहयोग महत्वपूर्ण है। अपनी भावनाओं को खुलकर साझा करना, नियमित व्यायाम करना और अपनों के साथ संवाद बनाए रखना मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक होता है। उन्होंने लोगों से मानसिक समस्याओं को गंभीरता से लेने और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श प्राप्त करने की अपील की।

कार्यक्रम में डॉ. मालविका पांडे ने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रमुख लक्षणों, बचाव के उपायों और उपचार की उपलब्ध सुविधाओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि व्यवहार में लगातार बदलाव, अत्यधिक चिंता, नींद में परेशानी, मन उदास रहना तथा दैनिक गतिविधियों में रुचि कम होना जैसे लक्षण दिखाई देने पर विशेषज्ञ से परामर्श लेना उपयोगी होता है। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान और उचित उपचार के महत्व को रेखांकित किया।

डॉ. नितेश सिंह ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की थीम और उसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सामाजिक जागरूकता बढ़ाना, भ्रांतियों को दूर करना और जरूरतमंद व्यक्तियों को सहयोग प्रदान करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

वहीं, डॉ. संतोष कुमार ने मानसिक विकारों की वैश्विक व्यापकता और उनसे उत्पन्न स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों की जानकारी दी। उन्होंने भारत सरकार के राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम तथा टेली-मानस (Tele-MANAS) सेवा के बारे में बताते हुए मानसिक स्वास्थ्य परामर्श और सहायता की उपलब्धता के प्रति लोगों को जागरूक किया।

कार्यक्रम में पैथोलॉजी विभाग के डॉ. रवि रंजन सिंह, माइक्रोबायोलॉजी विभाग के डॉ. अरिंदम चक्रवर्ती, डॉ. राकेश शुक्ला, डॉ. शारदा, डॉ. नंदनी राघव, डॉ. आत्मिक सिंह और डॉ. शिवम् बिश्नोई सहित अन्य चिकित्सक उपस्थित रहे। जूनियर रेजिडेंट, सीनियर रेजिडेंट, इंटर्न डॉक्टर तथा एमबीबीएस प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।

कार्यक्रम के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं कमजोरी का प्रतीक नहीं हैं और इनके लिए सहायता लेना पूरी तरह सामान्य है। नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, संतुलित दिनचर्या, सकारात्मक सामाजिक संबंध और समय पर चिकित्सकीय परामर्श मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

महाविद्यालय में आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से चिकित्सकों एवं विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने तथा समाज में जागरूकता फैलाने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का मूल संदेश रहा कि मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति, स्वस्थ परिवार और स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

Ashok Kesarwani- Editor
Author: Ashok Kesarwani- Editor