निषादराज बोट सब्सिडी योजना के तहत 1865 मछुआरों को किया जायेगा लाभांवित

उत्तर प्रदेश,

निषादराज बोट सब्सिडी योजना के तहत 1865 मछुआरों को किया जायेगा लाभांवित,

न्यूज ऑफ इंडिया (एजेन्सी)

उत्तर प्रदेश के मत्स्य विकास विभाग के कैबिनेट मंत्री डा0 संजय कुमार निषाद द्वारा आज यहां मत्स्य निदेशालय में आयोजित कार्यक्रम में वर्ष 2023-24 हेतु विभागीय योजनाओं के लिए आम जन-मानस से आवेदन प्राप्त करने के लिए पोर्टल का शुभारम्भ किया गया। पोर्टल पर प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना, निषादराज बोट सब्सिडी योजना, सामूहिक दुर्घटना बीमा योजना तथा मत्स्य पालक कल्याण कोष योजना के अन्तर्गत विभिन्न परियोजाओं हेतु आनलाईन आवेदन विभागीय वेबसाईट पर प्राप्त किये जाएंगे। मंत्री जी द्वारा मत्स्य निदेशालय लखनऊ के आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित वीडियों कान्फ्रेन्सिग कक्ष का लोकार्पण भी किया गया।

इस अवसर पर मत्स्य मंत्री डा0 संजय कुमार निषाद ने मत्स्य विकास संबंधित कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए प्रेस प्रतिनिधियों को बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के अन्तर्गत निजी भूमि पर तालाब निर्माण, मत्स्य बीज हैचरी निर्माण, बायोफ्लाक पॉण्ड, रियरिंग तालाब निर्माण, रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम, इन्सुलेटेड व्हीकल्स, मोटर साइकिल विद आइसबॉक्स, थ्री-व्हीलर विद आइसबॉक्स, साइकिल विद आइसबॉक्स, जिन्दा मछली विक्रय केन्द्र, मत्स्य आहार प्लान्ट, मत्स्य आहार मिल, केज संवर्धन, पेन संवर्धन, सजावटी मछली रियरिंग यूनिट, कियोस्क निर्माण, शीतगृह निर्माण, मनोरंजन मात्स्यिकी, डाइग्नोस्टिक मोबाईल लैब, मत्स्य सेवा केन्द्र एवं सामूहिक दुर्घटना बीमा सहित कुल 30 योजनाओं हेतु आनलाइन आवेदन दिनांक 30 मई से 15 जून, 2023 तक आमंत्रित किए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजनान्तर्गत अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त (अल्ट्रा मार्डन) फिश मार्केट की स्थापना की जा रही है। वर्तमान में जनपद चन्दौली में अल्ट्रा मार्डन फिश मण्डी निर्माणाधीन है। इस वर्षजनपद गोरखपुर व मुरादाबाद में मत्स्य आयात निर्यात को बढावा देने प्रदेश के अन्य जनपदों में उत्पादित मछली का उचित मूल्य मत्स्य पालकों/व्यवसायियों को उपलब्ध होने, क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान, मत्स्य पालकों के आय को बढाने, रोजगार सृजन, मत्स्य पालन क्षेत्र को बढावा देने, सामुद्रिक मत्स्य उत्पाद की उपलब्धता, मत्स्य से सम्बन्धित निवेश एवं अन्य सामग्रियों की उपलब्धता के दृष्टिगत बनाया जाना प्रस्तावित है जिसकी लागत प्रति इकाई रू0 60.00 करोड़ है।मण्डी निर्माण से उत्त्र प्रदेष की 01 ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान होगा।

डा0 निषाद ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजनान्तर्गत मात्स्यिकी सेक्टर के संगठित विकास हेतु केन्द्र प्रायोजित परियोजना के अन्तर्गत जनपद- गोरखपुर एवं मथुरा में इन्टीग्रेटेड एक्वापार्क बनाये जाने की परियोजना का प्रावधान हैं, जिसकी लागत प्रति इकाई रू0 100.00 करोड़ है। वित्तीय वर्ष 2023-24 हेतु जनपद- गोरखपुर एवं मथुरा में इन्टीग्रेटेड एक्वापार्क की स्थापना का प्रस्ताव राज्य स्तरीय अनुश्रवण एवं अनुमोदित समिति द्वारा अनुमोदित किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश की 1 ट्रिलियन इकोनॉमी में इसका महत्वपूर्ण योगदान होगा। योजना के प्रारम्भ से अब तक रू0 18951.20 लाख अनुदान लाभार्थियों को वितरित किया गया है। योजना के अन्तर्गत 1794 (क्षेत्रफल 1386.12 हेक्टेयर) निजी भूमि पर तालाबों, 59 (क्षेत्रफल 73.21 हेक्टेयर) खारे भूमि पर तालाबों, 176 (क्षेत्रफल 165.632 हेक्टेयर) रियरिंग यूनिट, 661 बायोफ्लाक, 32 मत्स्य बीज उत्पादन हैचरी, 660 रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम, 19 इन्सूलेटेड व्हीकल्सएवं मोबाईल लैब, 143 मोटरसाइकिलविद आइसबॉक्स, 50 थ्री-व्हीलर विद आइसबॉक्स, 1379 साइकिल विद आइसबॉक्स, 34 जिन्दा मछली विक्रय केन्द्र, 45 मत्स्य आहार मिल, 29 कियोस्क,01 बैकयार्ड आर्नामेन्टल फिश रियरिंग यूनिट, 85 केज सहित कुल 6904 परियोजनाएं पूर्ण करायी गयी जिसकी कुल परियोजना लागत रू0 33173.0425 लाख है। 11513 परियोजनाओं का कार्य प्रगति पर हैजिसकी कुल परियोजना लागत रू0 32050.517 लाख है।

मत्स्य विकास मंत्री ने कहा कि रिवर रैचिंग कार्यक्रम के अन्तर्गत नदियों में मत्स्य संरक्षण हेतु 188.15 लाख बड़े आकार के मत्स्य बीज (मत्स्य अंगुलिकाएं) गंगा नदी प्रणाली में प्रवाहित करायी गयी जिस पर रू0 488.90 लाख धनराशि व्यय हुयी। वित्तीय वर्ष 2023-24 हेतु प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजनान्तर्गत रू0 107015.42लाख की कार्ययोजना का अनुमोदन राज्य स्तरीय अनुमोदन एवं अनुश्रवण समिति से प्राप्त करते हुए उक्त कार्ययोजना का अनुमोदन राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड को प्रेषित करते हुए भारत सरकार से रू0 44260.63 लाख का केन्द्रांश अवमुक्त किये जाने हेतु अनुरोध किया गया है। सामूहिक दुर्घटना बीमा योजनान्तर्गत अब तक 102840 मछुआरों/मत्स्य पालकों को आच्छादित किया गया है। नदियों में मत्स्य उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने वमत्स्य संरक्षण हेतु रिवर रैचिंग कार्यक्रम के अन्तर्गत मत्स्य अंगुलिका संचय कराया जायेगा, जिसका लाभ मछुआरों को मिलेगा।

डा0 निषाद ने बताया कि मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजनान्तर्गत ग्राम समाज के पट्टे पर आवंटित तालाबों में मत्स्य पालन हेतु निवेश तथा मत्स्य बीज बैंक की स्थापना हेतु सुविधा प्रदान की जा रही है। परियोजना की इकाई लागत रू0 4.00 लाख पर 40 प्रतिशत रू0 1.60 लाख अनुदान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के अन्तर्गत अब तक रू0 849.78 लाख अनुदान 648 लाभार्थियों को प्रदान किया गया है जिससे 612.50 हेक्टेयर जलक्षेत्रों में मत्स्य पालन हेतु निवेश के लिए अनुदान की सुविधा उपलब्ध कराई गयी है। योजना के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2023-24 में 10.00 करोड़ का बजट प्रावधान कराया गया है, जिसके अन्तर्गत 625 हेक्टेयर जलक्षेत्रों में मत्स्य पालन निवेश एवं मत्स्य बीज बैंक की स्थापना हेतु लगभग 700 लाभार्थियों को लाभान्वित किया जाएगा।

डा0 निषाद ने बताया कि निषादराज बोट सब्सिडी योजनान्तर्गत मत्स्य पालकों/मछुआरों को मछली पकड़ने एवं नौकायन हेतु नाव, जाल, लाईफ जैकेट, आइसबॉक्स आदि क्रय करने की सुविधा प्रदान करने हेतु आवेदन पत्र आमंत्रित किए जाएंगे। योजना की इकाई लागत रू0 67,000/- पर 40 प्रतिशत रू0 26,800/- अनुदान दिया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2023-24 में रू0 5.00 करोड़ का बजट प्रावधान कराया गया है जिसके अन्तर्गत नाव, जाल आदि क्रय हेतु 1865 मछुआरों को लाभान्वित किया जाएगा।

मत्स्य मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश मत्स्य पालक कल्याण कोष के अन्तर्गत मत्स्य पालकों/मछुआरों के आर्थिक/सामाजिक उत्थान एवं स्वरोजगार हेतु मत्स्य पालक/मछुआरा बाहुल्य ग्रामों में अवसंरचनात्मक सुविधाओं का निर्माण, दैवीय आपदाओं से हुई किसी क्षति में वित्तीय सहायता, चिकित्सा सहायता, मछुआ आवास निर्माण सहायता, मत्स्य पालकों एवं मछुआरों के प्रशिक्षण, महिला सशक्तिकरण सहित कुल छःयोजनाएं संचालित की जा रही हैं। योजना में वित्तीय वर्ष 2023-24 में रू0 25.00 करोड़ का बजट प्रावधान कराया गया है। योजना के अन्तर्गत सामुदायिक भवन निर्माण, मछुआ आवास निर्माण, दैवीय आपदा में चिकित्सा सहायता, प्रशिक्षण एवं महिला सशक्तिकरणसशक्तिकरण के माध्यम से मत्स्य पालकों एवं मछुआरों को लाभान्वित किया जाएगा।
इस अवसर पर मत्स्य विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव डा0 रजनीश दुबे ने बताया कि मंत्री जी के दिशा-निर्देशन में मत्स्य विकास विभाग द्वारा मत्स्य पालकों एवं मत्स्य गतिविधियों में लगे हुए व्यक्तियों को सभी सुविधायें उपलब्ध कराते हुए योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। बैंकों के माध्यम से किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा दिलायी जा रही है जिसके अन्तर्गत रू0 1.60 लाख तक का बैंक ऋण बिना किसी जमानत के दिया जाता है। अब तक 13788 मत्स्य पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराया गया है।

कार्यक्रम में मत्स्य विकास विभाग के विशेष सचिव एवं निदेशक श्री प्रशांत शर्मा ने मत्स्य विभाग की उपलब्धियों एवं आगामी योजनाओं के संबंध में प्रस्तुतीकरण दिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मत्स्य पालकों और मत्स्य गतिविधियों से जुड़े लोगों को विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ पहुंचाने हेतु विभाग द्वारा हरसंभव कार्य किया जा रहा है।

Ashok Kesarwani- Editor
Author: Ashok Kesarwani- Editor