कौशाम्बी: कौशाम्बी में जिंदा बेटी का पिंडदान कर पिता ने किया तेरहवीं संस्कार,
यूपी के कौशाम्बी जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने पारिवारिक रिश्तों, भावनाओं और सामाजिक मान्यताओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है। संदीपन घाट थाना क्षेत्र में बेटी के प्रेम प्रसंग से आहत एक पिता ने अपनी जीवित इकलौती बेटी का पिंडदान कर तेरहवीं संस्कार कर दिया। पिता का आरोप है कि बेटी के घर छोड़ने के सदमे में उनकी पत्नी की मौत हो गई। पत्नी को खोने और बेटी से रिश्ते टूटने के दर्द के बीच पिता ने बेटी को अपनी चल-अचल संपत्ति से बेदखल करने का भी फैसला लिया है। आखिर इस परिवार में ऐसा क्या हुआ कि पिता ने अपनी जिंदा बेटी को ही मृत मान लिया।
मामला संदीपन घाट थाना क्षेत्र में मूरतगंज-पल्हाना रोड का है। यहां रहने वाले राजू गुप्ता की इकलौती बेटी ज्योति गुप्ता 15 अक्टूबर को कॉलेज जाने के लिए घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की तो जानकारी मिली कि वह धन्नी गांव निवासी अमरदीप रैदास के साथ चली गई है। बेटी के इस फैसले से परिवार को गहरा सदमा लगा और घर में तनाव का माहौल बन गया।
परिवार के लिए यह घटना उस वक्त और दुखद हो गई, जब बेटी के घर छोड़ने से आहत उसकी मां पार्वती गुप्ता की मौत हो गई। राजू गुप्ता का आरोप है कि बेटी के इस कदम से उनकी पत्नी को गहरा सदमा लगा, जिसे वह बर्दाश्त नहीं कर सकीं। पत्नी की मौत के बाद राजू गुप्ता पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। एक तरफ जीवनसंगिनी को खोने का गम, तो दूसरी तरफ इकलौती बेटी के घर छोड़ने का दर्द—इस दोहरे सदमे ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया।
मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने ज्योति और उसके प्रेमी को हिरासत में लेकर पूछताछ की। बताया जाता है कि मां की मौत की सूचना मिलने के बावजूद ज्योति अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुई। पुलिस के मुताबिक, ज्योति के बालिग होने के कारण उसका बयान अदालत में दर्ज कराया गया, जिसके बाद उसे अपनी इच्छा से प्रेमी के साथ जाने दिया गया।
पत्नी की मौत और बेटी के फैसले से टूट चुके राजू गुप्ता ने इसके बाद ऐसा कदम उठाया, जिसने इलाके में लोगों को हैरान कर दिया। उन्होंने अपनी दिवंगत पत्नी के साथ जीवित बेटी का भी पिंडदान कर तेरहवीं संस्कार कर दिया। इतना ही नहीं, पिता ने बेटी को अपनी चल-अचल संपत्ति से बेदखल करने का फैसला भी लिया है। पिता के इस कदम की चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है।
राजू गुप्ता का कहना है कि बेटी के प्रेम प्रसंग से पैदा हुए सदमे के कारण उनकी पत्नी की मौत हुई और इस पीड़ा को वह कभी भुला नहीं पाएंगे। हालांकि, पत्नी की मौत के पीछे की परिस्थितियों को लेकर स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। यह घटना एक परिवार के भीतर टूटते रिश्तों, माता-पिता की भावनाओं और बालिग संतान के अपने फैसले लेने के अधिकार जैसे संवेदनशील सवाल भी खड़े करती है। एक तरफ पिता अपने दुख और आक्रोश में बेटी से संबंध तोड़ने का फैसला ले रहे हैं, तो दूसरी तरफ बेटी ने अपनी जिंदगी का अलग रास्ता चुना है।







