कौशाम्बी: कौशाम्बी में राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के नेतृत्व में UGC को लेकर प्रदर्शन,राष्ट्रपति को संबोधित डीएम को सौंपा ज्ञापन,
यूपी के कौशाम्बी में राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा जिलाध्यक्ष राजीव कुमार तिवारी ने मंगलवार को यूजीसी की विवादित और भेदभाव वाली नीतियों का विरोध किया। उन्होंने डीएम के माध्यम से राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा।
कार्यकर्ताओं ने मांग की कि इन नीतियों की तुरंत समीक्षा की जाए, ताकि विद्यार्थियों, युवाओं और अलग-अलग वर्गों के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा हो सके।
ज्ञापन में कहा गया कि देश के करोड़ों विद्यार्थियों, युवाओं और नागरिकों की भावनाओं और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। मोर्चा ने संविधान के अनुच्छेद 14 में समानता के अधिकार और अनुच्छेद 15 में धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव पर रोक का जिक्र किया। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सभी को समान अवसर देने की मांग की।
मोर्चा की प्रमुख मांगों में यूजीसी की विवादित नीतियों, नियमों और प्रावधानों की तुरंत समीक्षा करना शामिल है। साथ ही, यह भी मांग की गई कि इन नीतियों से विद्यार्थियों और अलग-अलग वर्गों के नागरिकों में भेदभाव की आशंका खत्म की जाए।
उन्होंने सामान्य वर्ग के नागरिकों, विद्यार्थियों और युवाओं के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक अधिकारों की रक्षा के लिए राष्ट्रीय सामान्य वर्ग आयोग बनाने की मांग की। इस आयोग को पर्याप्त कानूनी और संस्थागत अधिकार मिलने चाहिए, ताकि वह शिकायतों की सुनवाई कर संबंधित विभागों को सही सुझाव दे सके।
मोर्चा ने यह भी मांग की कि शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में हर नागरिक को समान अवसर और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का अधिकार मिले। विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में सभी वर्गों के विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और भेदभाव रहित माहौल सुनिश्चित किया जाए।
इसके अलावा, नीति बनाने से पहले विद्यार्थियों, शिक्षाविदों, अभिभावकों और समाज के अलग-अलग वर्गों से बड़े पैमाने पर सुझाव लिए जाने चाहिए। आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, फीस सहायता, आवास, शिक्षा ऋण और रोजगार से जुड़ी योजनाओं को और प्रभावी बनाया जाए।
मोर्चा ने साफ किया कि वह किसी भी वर्ग के अधिकारों का विरोध नहीं करता, बल्कि सभी के लिए समान अधिकार और अवसर की मांग करता है। ज्ञापन में राष्ट्रपति से इस मामले में जरूरी संवैधानिक और प्रशासनिक कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है।








