कौशाम्बी: बाल संरक्षण के लिए बच्चों को उनके अधिकारों की जानकारी होना जरूरी: डॉ. नरेन्द्र दिवाकर,
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कौशाम्बी के तत्वावधान में गणेशदीन इंटर कॉलेज, कसेन्दा, चायल कौशाम्बी में “बाल संरक्षण एवं बाल हितैषी कानूनी सेवाएं” विषय पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
शिविर में विद्यार्थियों को बाल अधिकारों, बाल संरक्षण से संबंधित कानूनों तथा जरूरतमंद बच्चों के लिए उपलब्ध निःशुल्क कानूनी सेवाओं की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में पीएलवी ममता दिवाकर ने बच्चों के साथ होने वाली हिंसा, शोषण, बाल श्रम, बाल विवाह तथा अन्य समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल कानून की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार, विद्यालय और समाज की भी सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने विद्यार्थियों से किसी भी प्रकार की समस्या होने पर चुप न रहने, माता-पिता, शिक्षक से बात करने और उचित माध्यम से सहायता लेने का आह्वान किया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आम जन मानस को प्रदान की जाने वाली सेवाओं, सहूलियतों और केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी दिया।
मुख्य वक्ता डॉ. नरेन्द्र दिवाकर ने कहा कि बच्चों के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देना बाल संरक्षण व्यवस्था का मूल उद्देश्य है। प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण, शिक्षा, सम्मान और न्याय पाने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि विधिक सेवाओं का उद्देश्य जरूरतमंद व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना है और बच्चों से संबंधित मामलों में संवेदनशील एवं बाल हितैषी दृष्टिकोण अपनाया जाना आवश्यक है।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) की बच्चों के लिए बाल हितैषी कानूनी सेवाएं योजना 2024 के तहत बच्चों को न्याय तक आसान पहुंच प्रदान की जाती है। इस योजना का उद्देश्य 18 वर्ष से कम उम्र के प्रत्येक बच्चे को पैनल लायर्स, लीगल एड डिफेंस काउंसिल और पीएलवी के माध्यम से बिना किसी भेदभाव के मुफ्त, सुरक्षित और बाल हितैषी कानूनी सहायता पाने का अधिकार प्रदान करना है। इसके तहत कानून के विवाद में फंसे बच्चे, संरक्षण व देखभाल की जरूरत वाले बच्चे तथा शोषण, तस्करी व बाल के श्रम के शिकार आदि को हर चरण में सहायता प्रदान की जाती है। इसके लिए माता-पिता या कानूनी अभिभावक लीगल सर्विस यूनिट फ़ॉर चिल्ड्रेन (एलएसयूसी) या पीएलवी से संपर्क कर प्रार्थना पत्र दे सकते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने तथा बाल अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में समय रहते सहायता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। पॉक्सो अधि., मिशन वात्सल्य योजना, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधि. आदि के बारे में जानकारी प्रदान की गई। किशोर न्याय अधि., शिविर के दौरान उपस्थित विद्यार्थियों एवं शिक्षकों से बाल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने और बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने में सहयोग के लिए अपील की गई।कार्यक्रम को एडीओ समाज कल्याण स्वागत अग्रहरी और क्षेत्रीय लेखपाल शशि प्रकाश त्रिपाठी ने भी संबोधित किया।
कार्यक्रम में विद्यालय के प्रबंधक सुधीर कुमार, प्रधानाचार्य श्रीपति सिंह शिक्षक-शिक्षिकाएं शीला, दीक्षा, गीतांजली, नेहा, कहकशां, ललिता, निशा, महक, संजना, स्वाती, हिमांशी, अनदीप, रवींद्र, धर्मेन्द्र और विक्रम सहित सैकड़ों विद्यार्थी मौजूद रहे।








