कौशाम्बी: समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी:प्रिया सिंह,
यूपी के कौशाम्बी जिले के आदर्श ग्रामपंचायत गोविन्दपुर, विकास खण्ड-नेवादा, तहसील-चायल में पीसीपीएनडीटी एक्ट के अंतर्गत लिंग चयन विषय पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
शिविर में गर्भधारण पूर्व और प्रसवपूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) अधिनियम, 1994 के इतिहास और प्रमुख प्रावधानों और भ्रूण हत्या पर बात करते हुए डॉ. नरेन्द्र दिवाकर ने कहा कि भ्रूण हत्या (विशेषकर कन्या भ्रूण हत्या) समाज, स्वास्थ्य और देश के भविष्य के लिए एक गंभीर अभिशाप और अपराध है।
भारत में यह पितृसत्तात्मक प्रकृति, महिला विरोधी पूर्वाग्रहों, सामाजिक और आर्थिक कारणों की वजह से सदियों से कन्या भ्रूण हत्या एक समस्या रही है। इससे जहां एक तरफ लिंगानुपात में कमी आती है तो वहीं दूसरी तरफ हिंसा और अपराध में बढ़ोत्तरी, मातृ मृत्युदर में वृद्धि होती है। जिससे सामाजिक ताना-बाना पर असर पड़ने के साथ साथ महिला को मानसिक तनाव व स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं का सामना करना पड़ता है।
इन सबसे बचने के लिए ही 1994 में पीसीपीएनडीटी एक्ट बनाया गया जिसे 1996 में पूरे देश में लागू किया गया। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य गर्भाधान से पहले और प्रसव से पूर्व लिंग चयन तकनीकों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाना और लिंग-चयनात्मक गर्भपात के लिये प्रसवपूर्व निदान तकनीकों के दुरुपयोग को रोकना तथा इस हेतु विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाना है।
यह अधिनियम अल्ट्रासाउंड मशीन जैसे- प्रसवपूर्व निदान तकनीकों के उपयोग को विनियमित करता है और इस प्रकार की मशीनों को केवल आनुवंशिक असामान्यताओं, गुणसूत्रीय असामान्यताओं, कुछ जन्मजात विकृतियों, हीमोग्लोबिनोपैथी तथा लिंग संबंधी विकार का पता लगाने के लिये उपयोग में लाने की अनुमति देता है।साथ ही प्रसव पूर्व निदान तकनीक (जैसे अल्ट्रासाउंड मशीन) का उपयोग करने वाले सभी अस्पतालों, क्लीनिकों और केंद्रों के अनिवार्य पंजीकरण और पंजीकृत केंद्र के बाहर चेतावनी बोर्ड को दृश्य स्थान पर लगाना अनिवार्य करता है।
दोषी पाए जाने पर 5 साल तक के कारावास और 1 लाख रूपये के जुर्माने और दोषी डॉक्टर या केंद्र का मेडिकल रजिस्ट्रेशन भी रद्द करने का प्रावधान है।यह कानून महिला के बिना लिखित सहमति जांच करने पर भी रोक लगता है। भ्रूण हत्या के रोकथाम के लिए जरूरी है कि समाज जागरूक हो और सरकारी अभियानों से जुड़े।
सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कौशाम्बी प्रिया सिंह ने अपनी बात रखते हुए कहा कि बेटों के साथ बेटी को भी जन्म लेने का अधिकार दें, कन्या भ्रूण हत्या का विरोध करें तथा भ्रूण के लिंग की जांच कराने या इसकी जानकारी प्राप्त करने से पूरी तरह बचें। समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। कहा कि वर्तमान समय में अगर देखा जाय तो गांव समाज की बेटियां भी हर क्षेत्र में नाम रोशन कर रही है और देश विदेश में अपनी शक्ति का परचम लहरा रही है। सचिव महोदया ने महिलाओं की उपस्थिति पर पसन्नता जाहिर की एवं सभी पीएलवी को उनकी सहायता करने हेतु दिशा निर्देश भी दिए।
पीएलवी ममता दिवाकर ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं एवं महिला एवं बाल कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजनाएं जैसे मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना,मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, विवाह अनुदान योजना, स्पॉन्सरशिप योजना,वृद्धा पेंशन एवं निराश्रित महिला पेंशन योजना, दिव्यांग सहायता योजना एवं निशुल्क अधिवक्ता प्रदान किए जाने संबंधित योजनाओं एवं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण हेल्पलाइन 15100 की जानकारी दी।कार्यक्रम का संचालन अमरदीप दिवाकर ने तथा धन्यवाद ज्ञापन एडीओ (आर डी ) दिलीप कुमार पाण्डेय ने दिया।
इस अवसर पर ग्राम प्रधान सतीश कुमार गुप्ता, सचिव मुकेश कुमार गुप्ता, हल्का लेखपाल संदीप सिंह, एवं पीएलवी अमरेंद्र प्रताप, निलेश कुमार, अर्चना पाल, मनीषा दिवाकर समूह सखी रिया शर्मा, राधिका,सीमा, शशि, रेखा, अंजली, सुशीला, मंजू, प्रीति के अलावा गांव की सैकड़ों महिलाएं, पुरुष, बच्चे उपस्थित रहे।








