कौशाम्बी: भवन्स मेहता महाविद्यालय, भरवारी में लोक भारती प्रकाशन, प्रयागराज द्वारा दो दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन,
यूपी के कौशाम्बी जिले के भवन्स मेहता महाविद्यालय, भरवारी में लोक भारती प्रकाशन प्रयागराज द्वारा दो दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर प्रबोध श्रीवास्तव ने किया। सर्वप्रथम प्राचार्य ने माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित करके कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की।
इस अवसर पर उन्होंने” पुस्तकों की महत्ता और और अर्थवत्ता” पर अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा की आज के तकनीकी युग में पुस्तकों का महत्त्व घटता जा रहा है लेकिन एक बात याद रखना की पुस्तकों का स्थान कभी भी ख़त्म नही हो सकता इसके आगे उन्होंने छात्रों को पुस्तक पढ़ने के लिए प्रेरित किया।
हिंदी विभाग के प्रसिद्ध कवि और आलोचक प्रोफेसर विवेक कुमार त्रिपाठी निराला ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि डिजिटल युग में स्क्रीन टाइम बढ़ने के कारण पुस्तकों से दूरी चिंताजनक है। पुस्तकें केवल ज्ञान का माध्यम नहीं हैं, बल्कि ये विचार प्रक्रिया को परिपक्व बनाती हैं। हिंदी साहित्य हमारी सांस्कृतिक धरोहर और संवेदनाओं का दर्पण है। प्रत्येक छात्र को प्रतिदिन कम से कम आधा घंटा हिंदी साहित्य पढ़ने का नियम बनाना चाहिए।इसके उपरांत लोक भारती से पधारे राजकुमार ने अपने विचार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल एक विषय नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। ऐसी प्रदर्शनियों से विद्यार्थियों में पुस्तकों के प्रति जिज्ञासा और पढ़ने का रुझान बढ़ता है।
इस प्रदर्शनी में मशहूर कवियों और लेखकों की चर्चित रचनाएँ मौजूद हैं।इस प्रदर्शनी में चर्चित रचना अरुनधति राय की मेरी माँ मेरी गैंगस्टर, नौकर की कमीज, प्रेमचंद के सभी उपन्यास, रश्मिरथी, नदी के द्वीप, ममता कालिया का जीते जी इलाहाबाद, चित्रलेखा, सोफी का संसार आदि पुस्तकें हैं।
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्रोफेसर विमलेश कुमार सिंह यादव,मशहूर कहानीकार डॉ.सी पी श्रीवास्तव और डॉ.धर्मेन्द्र कुमार अग्रहरि, डॉ. दीपक आदि प्राध्यापक एवं कर्मचारी उपस्थित थे।








