कौशाम्बी: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा राजकीय बाल संप्रेषण गृह (किशोर) खुल्दाबाद प्रयागराज में आयोजित हुआ विधिक साक्षरता एवं जागरुकता शिविर,
यूपी के कौशाम्बी जिले में शनिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जनपद न्यायालय कौशाम्बी के तत्वावधान में राजकीय बाल संप्रेषण गृह (किशोर) खुल्दाबाद प्रयागराज में शोषण के विरूध अधिकार, बच्चों का संरक्षण अधि० (पॉक्सो) 2012, बच्चों के अधिकार विषय पर साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
डॉ. नरेन्द्र दिवाकर ने शोषण के विरूद्ध अधिकार और बाल अधिकार पर बात करते हुए कहा कि बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर कई कानूनी प्रावधान है। उन्होंने बताया कि शोषण के विरुद्ध अधिकार किसी भी व्यक्ति को गुलामी और अमानवीय परिस्थितियों से बचाते हैं। शोषण के विरुद्ध अधिकार से जुड़े प्रावधान भारतीय संविधान (अनु. 23 और 24) सहित कई कानूनों में दिए गए हैं। अनैतिक व्यापार अधिनियम 1956,
किशोर न्याय अधिनियम (2015), शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम (2009), बाल श्रम निषेध (संशोधन) अधिनियम (2016), और यौन अपराधों से बच्चों की सुरक्षा (POCSO) अधिनियम (2012), बंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम 1976 हैं, अनैतिक चित्रण अधिनियम जो बच्चों को शिक्षा, शोषण से सुरक्षा प्रदान करते हैं और सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करते हैं।
शोषण के विरुद्ध अधिकार महिलाओं और बच्चों के अनैतिक व्यापार, बेगार, बंधुआ मजदूरी का उन्मूलन, बालश्रम पर रोक लगाने के साथ ही सुनिश्चित करता है कि श्रमिकों के साथ गुलामों की तरह व्यवहार न हो और उन्हें उनके काम करने के लिए न्यायसंगत वेतन व सम्मानजनक स्थितियां मिले।
शोषण के विरुद्ध अधिकार समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करके समता, समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांत की रक्षा करता है।
पराविधिक स्वयं सेवक ममता दिवाकर ने पॉक्सो एक्ट अर्थात यौन अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 पर बात करते हुए कहा कि इस अधिनियम में गंभीर अपराधों में मृत्युदंड तक की सजा का प्रावधान है।
यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 या पॉश एक्ट यौन उत्पीड़न की शिकार पीड़िता की शिकायतों के समाधान के लिए संस्थान के भीतर आंतरिक परिवाद समिति और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं की शिकायतों के निवारण के लिए स्थानीय परिवाद समिति के गठन का प्रावधान है जिससे महिला कर्मचारियों की भागीदारी और उत्पादकता में वृद्धि हो सके।
साथ ही केन्द्र और राज्य सरकार के द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं यथा मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना, कन्या सुमंगला योजना, वृद्धापेंशन और निराश्रित महिला पेंशन योजना, दिव्यांग सहायता योजना, शिक्षा का अधिकार अधिनियम, दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 (1 जुलाई 1961 से प्रभावी), घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा प्रदत्त सेवाओं, 15100 नालसा हेल्प लाइन आदि के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान किया।
अधिकार मित्र अमरदीप दिवाकर ने अपनी बार रखते हुए कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गरीब एवं जरूरतमंद व्यक्तियों को निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराना,आम जनता को उनके कानूनी एवं मौलिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना, राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से आपसी सहमति से विवादों का निस्तारण कराना, महिलाओं एवं बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी देना एवं वरिष्ठ नागरिकों एवं दिव्यांगजनों को विधिक सहायता उपलब्ध कराना,
जेलों में निरुद्ध बंदियों को निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करना, अपराध पीड़ितों को नियमानुसार प्रतिकर दिलाने में सहायता करना, मध्यस्थता एवं सुलह के माध्यम से विवादों का समाधान कराना साथ ही
विभिन्न सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी पात्र व्यक्तियों तक पहुँचाना ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य है।
इसी प्रकार मजदूरों, किसानों, दिव्यांगजनों, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों को उनके अधिकारों और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करना भी हमारा दायित्व है।
इस शिविर में राजकीय बाल संप्रेषण गृह में रह रहे सैकड़ों की संख्या में रहवासी बालक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।








