मेरे सपनों का भारत’ और ‘विकसित भारत 2047’ की रंगों में सजी कल्पनाएँ, नौनिहालों ने कैनवास पर उकेरा राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का सपना

कौशाम्बी: ‘मेरे सपनों का भारत’ और ‘विकसित भारत 2047’ की रंगों में सजी कल्पनाएँ, नौनिहालों ने कैनवास पर उकेरा राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का सपना,

रंग जब कल्पना से मिलते हैं तो केवल चित्र नहीं बनते,बल्कि भविष्य की तस्वीर आकार लेती है। इसी भावभूमि को साकार करते हुए जनपद कौशाम्बी में ‘मेरे सपनों का भारत’ एवं ‘विकसित भारत 2047’ विषय पर जिला स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता एवं प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के प्रथम चरण में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान मंझनपुर में परिषदीय विद्यालयों के कक्षा 06से 08 तक के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग करते हुए अपनी कल्पनाओं,आकांक्षाओं और राष्ट्र निर्माण के सपनों को रंगों के माध्यम से कागज पर उकेरा।

चित्रकला प्रतियोगिता में बच्चों ने भारत की सांस्कृतिक विविधता, स्वच्छता,पर्यावरण संरक्षण,शिक्षा, तकनीकी प्रगति, महिला सशक्तीकरण, आत्मनिर्भरता,ग्रामीण विकास तथा आधुनिक भारत की परिकल्पना को अपनी कला में अभिव्यक्त किया।

किसी चित्र में तिरंगे की शान दिखाई दी तो किसी में हरित-भरे भारत की तस्वीर,कहीं विज्ञान और तकनीक के सहारे आगे बढ़ते भारत का स्वप्न था, तो कहीं शिक्षा के प्रकाश से आलोकित समाज की कल्पना प्रतियोगिता के पश्चात उदयन सभागार में उत्कृष्ट पोस्टरों की प्रदर्शनी आयोजित की गई। प्रदर्शनी में विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई कलाकृतियों ने अतिथियों एवं उपस्थित दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। रंगों,रेखाओं और कल्पनाशीलता के माध्यम से बच्चों ने यह संदेश दिया कि *विकसित भारत का सपना केवल योजनाओं और संकल्पों का विषय नहीं, बल्कि नई पीढ़ी की कल्पना, प्रतिभा और सहभागिता से निर्मित होने वाला भविष्य है।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष कल्पना सोनकर ने बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि चित्रकला बच्चों के मन की भावनाओं और उनके सपनों को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास और राष्ट्र के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करते हैं। बच्चों की कल्पनाओं में दिखाई देने वाला भारत आने वाले समय की संभावनाओं का संकेत देता है।

विशिष्ट अतिथि में राज्य महिला आयोग उत्तर प्रदेश की सदस्य प्रतिभा कुशवाहा ने छात्र-छात्राओं की कलाकृतियों का अवलोकन करते हुए कहा कि बेटियों और बच्चों को अपनी प्रतिभा अभिव्यक्त करने के समान अवसर मिलना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ कला,संस्कृति और रचनात्मक गतिविधियाँ बच्चों के व्यक्तित्व को बहुआयामी बनाती हैं। उन्होंने प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाले सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ दीं।

कार्यक्रम में सीडीओ विनोद राम त्रिपाठी ने बच्चों की कलाकृतियों का अवलोकन करते हुए कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य तभी सार्थक होगा,जब देश की नई पीढ़ी ज्ञान, विज्ञान, कौशल, संस्कार और नवाचार के साथ आगे बढ़ेगी।

बीएसए डॉ. कमलेंद्र कुमार कुशवाहा ने छात्रों को अभिसिंचित करते हुए कहा विद्यालय केवल पुस्तकीय ज्ञान का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों की प्रतिभा को पहचानने और उसे निखारने का मंच भी है। चित्रकला जैसी गतिविधियाँ, विद्यार्थियों को अपनी कल्पना को रचनात्मक रूप देने का अवसर प्रदान करती हैं।

मंझनपुर के पूर्व विधायक लाल बहादुर ने भी विद्यार्थियों की कलात्मक प्रतिभा की सराहना की। उन्होंने कहा कि बच्चों के हाथों में थमा ब्रश केवल रंग नहीं भरता, बल्कि उनके मन में पल रहे सपनों को आकार देता है। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी ही कल के भारत के निर्माता होंगे और उनकी सोच में जितनी सकारात्मकता होगी, राष्ट्र का भविष्य उतना ही उज्ज्वल होगा।

जिला स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रथम पाँच छात्र-छात्राओं का चयन किया गया। इनमेंप्रथम स्थान – वंशू देवी, उच्च प्राथमिक विद्यालय बारह हवेली, विकासखंड कड़ा।द्वितीय स्थान – आयुष, प्राथमिक विद्यालय पिपरहटा, विकासखंड मूरतगंज।तृतीय स्थान – अंजली देवी,कंपोजिट विद्यालय टेनशाह आलमबाद, विकासखंड मंझनपुर।चतुर्थ स्थान- शिखा, उच्च प्राथमिक विद्यालय तिलगोड़ी, विकासखंड नेवादा।पंचम स्थान – सुवान्शु, उच्च प्राथमिक विद्यालय गोहरा मारूफपुर,विकासखंड कौशाम्बी।

इन विजेता छात्र-छात्राओं की कलाकृतियों में विषय की समझ, कल्पनाशीलता,रंग संयोजन तथा भविष्य के भारत की सकारात्मक तस्वीर को विशेष रूप से अभिव्यक्त किया गया। विजेताओं के चयन के साथ-साथ प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाले सभी विद्यार्थियों के प्रयासों की भी सराहना सांत्वना पुरस्कार के माध्यम से की गई।

प्रदर्शनी में लगाए गए पोस्टरों ने यह संदेश दिया कि बच्चों की दृष्टि में विकसित भारत केवल ऊँची इमारतों और आधुनिक तकनीक का नाम नहीं है। उनके सपनों का भारत ऐसा देश है, जहाँ प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, गाँवों में विकास पहुँचे,पर्यावरण सुरक्षित रहे,महिलाएँ सशक्त हों, किसान समृद्ध हों,विज्ञान और तकनीक का विस्तार हो तथा देश अपनी संस्कृति और संस्कारों को साथ लेकर प्रगति के पथ पर आगे बढ़े।

विभिन्न विद्यालयों से आए छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ अपनी कलाकृतियों का प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने भी बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए उनकी रचनात्मक अभिव्यक्ति को सराहा। प्रदर्शनी में उपस्थित अतिथियों ने विभिन्न चित्रों का अवलोकन किया और विद्यार्थियों से उनके चित्रों की विषय-वस्तु के संबंध में संवाद भी किया।

जिलाध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी धर्मराज मौर्य ने कहा कार्यक्रम ने यह सिद्ध किया कि कला शिक्षा का केवल सहायक माध्यम नहीं,बल्कि बच्चों की कल्पनाशक्ति, संवेदनशीलता और राष्ट्रबोध को विकसित करने का प्रभावी साधन भी है।‘मेरे सपनों का भारत’ में जहाँ बच्चों के व्यक्तिगत और सामाजिक सपने दिखाई दिए, वहीं ‘विकसित भारत 2047’ ने उनकी दूरदर्शी सोच को अभिव्यक्ति दी।

समापन अवसर पर प्रतिभागी छात्र-छात्राओं, विजेताओं,शिक्षकों तथा आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों को बधाई दी गई। कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट था-आज कागज पर उकेरे गए ये सपने ही कल भारत की वास्तविक तस्वीर बनेंगे।

कार्यक्रम का संचालन डॉ.ओम प्रकाश सिंह, बी0ई0ओ0 राजीव प्रताप सिंह, अरूण सिंह द्वारा किया गया।

Ashok Kesarwani- Editor
Author: Ashok Kesarwani- Editor