कौशाम्बी: सुलभ त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण न्याय की ओर बढ़ता कदम: मध्यस्थता, लोक अदालत एवं एडीआर तंत्र के प्रचार-प्रसार हेतु जागरूकता शिविर आयोजित,
यूपी के कौशाम्बी जिले में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वाधान में शुक्रवार को आमजन को त्वरित, सुलभ एवं निःशुल्क न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मध्यस्थता, लोक अदालत एवं स्थायी लोक अदालतों के कार्यों के प्रचार-प्रसार तथा वैकल्पिक विवाद निस्तारण (एडीआर) तंत्र के प्रावधानों एवं लाभों के संबंध में एक विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
शिविर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव प्रिया सिंह ने कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों के प्रश्नों का समाधान किया तथा उन्हें विधिक अधिकारों एवं उपलब्ध न्यायिक सुविधाओं के प्रति जागरूक किया गया और उपस्थित लोगों को न्यायालयों में लंबित मामलों के शीघ्र एवं सौहार्दपूर्ण निस्तारण के लिए उपलब्ध वैकल्पिक व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि मध्यस्थता एवं लोक अदालतें विवादों के समाधान का एक प्रभावी माध्यम हैं, जहां पक्षकार आपसी सहमति से अपने विवादों का निपटारा कर सकते हैं। इससे समय, धन एवं श्रम की बचत होती है तथा दोनों पक्षों के बीच आपसी संबंध भी बने रहते हैं। मध्यस्थ अजय कुमार पाण्डेय ने कहा कि लोक अदालतों में पारित निर्णय अंतिम एवं बाध्यकारी होते हैं तथा इनके विरुद्ध सामान्यतः अपील का प्रावधान नहीं होता।
शिविर में स्थायी लोक अदालतों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि जनोपयोगी सेवाओं से संबंधित विवादों का निस्तारण स्थायी लोक अदालतों के माध्यम से सरल एवं प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त (पीo एलo वीo) कृष्ण चंद्र चौधरी ने एडीआर तंत्र के अंतर्गत मध्यस्थता, सुलह, लोक अदालत जैसी व्यवस्थाओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी प्रदान की।
वक्ताओं ने लोगों से अपील की कि वे छोटे-मोटे विवादों के समाधान के लिए न्यायालयों में लंबी कानूनी प्रक्रिया अपनाने के बजाय एडीआर तंत्र का अधिकाधिक उपयोग करें। इससे न केवल न्यायालयों पर मामलों का बोझ कम होगा बल्कि आमजन को भी शीघ्र न्याय प्राप्त होगा। शिविर में बड़ी संख्या में नागरिकों, अधिवक्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं चायल तहसील SDM (अरुण कुमार) व चायल तहसीलदार संजय दुबे ने सहभागिता कर कार्यक्रम को सफल बनाया और शिविर में उपस्थित लोगों को ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों को समय-समय पर आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।








