कौशाम्बी: संजीवनी हॉस्पिटल एवं ट्रामा सेंटर सराय अकिल में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन,
यूपी के कौशाम्बी जिले में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जनपद न्यायालय कौशाम्बी के तत्वाधान में संजीवनी हॉस्पिटल एवं ट्रामा सेंटर सराय अकिल, चायल में विश्व योग दिवस के अवसर पर असंगठित क्षेत्र के श्रमिक एवं शिक्षा का अधिकार विषय पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए पराविधिक स्वयं सेवक ममता दिवाकर ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण समाज के कमजोर और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को निःशुल्क कानूनी सहायता, परामर्श और लोक अदालत के माध्यम से न्याय प्रदान करता है। आपदा पीड़ितों को क्षतिपूर्ति भी प्रदान की जाती है। इसके लिए पीड़ित अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) के सदस्य, महिलाएं, बच्चे, मानसिक रूप से बीमार, दिव्यांग व्यक्ति, प्राकृतिक आपदा, जातीय हिंसा या औद्योगिक आपदा के शिकार, औद्योगिक कामगार, हिरासत में लिए गए व्यक्ति पात्र होंगे। तीन लाख या इससे कम की वार्षिक आय वाले व्यक्ति भी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से सहायता प्राप्त कर सकते हैं। किसी भी समस्या के लिए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण हेल्प लाइन नंबर 15100, टोलफ्री नंबर 18004190234 पर भी कॉल कर जानकारी या सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
साथ ही महिला एवं बाल कल्याण विभाग केन्द्र और राज्य सरकार के द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं यथा मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना, स्पांसरशिप योजना, कन्या सुमंगला योजना, वृद्धापेंशन और निराश्रित महिला पेंशन योजना, दिव्यांग सहायता योजना, विभिन्न हेल्पलाइन नंबर जैसे 1098, 1090, 181आदि के बारे में भी विस्तार से जानकारी प्रदान किया।
प्रोफेसर राजकुमार चौधरी (सर्जरी विभाग मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज प्रयागराज) ने शिविर को संबोधित करते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं की जानकारी और पहुँच के अभाव के कारण श्रमिकों को आर्थिक असुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा से वंचित रहने और आपातकालीन चिकित्सा व्यय जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। योजनाओं का लाभ न मिल पाने से श्रमिकों का जीवन स्तर नहीं सुधर पाता और वे कर्ज के जाल में फंसते चले जाते हैं।
डा. अखिल चौधरी ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा हर एक बच्चे का कानूनी अधिकार है इसलिए अपने बच्चों को पढ़ाई पर जोर दे ताकि आगे चलकर ये बच्चे समृद्ध, शशक्त समाज का हिस्सा बनें।
डॉ. नरेन्द्र दिवाकर ने कहा कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिक यथा कृषि श्रमिक, घरेलू कामगार, स्ट्रीट वेंडर और रेहड़ी-पटरी वाले, निर्माण श्रमिक, दर्जी, नाई, धोबी, रिक्शा चालक और हस्तशिल्प कारीगर, डिलीवरी बॉय, कैब ड्राइवर आदि शामिल हैं,
वे करोड़ों कामगार हैं जो बिना किसी औपचारिक अनुबंध, निश्चित रोजगार या सामाजिक सुरक्षा के कार्य करते हैं। यह समूह देश के कुल कार्यबल का लगभग 93 प्रतिशत हिस्सा हैं और जीडीपी का आधा उत्पादन करते हैं फिर भी इन्हें निश्चित आय की कमी, सामाजिक सुरक्षा का आभाव, अनुकूल परिस्थितियों वाली कार्यादशाओं का आभाव, बलात श्रम आदि समस्याओं से गुजरना पड़ता है।
इस क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा और वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए सरकारी योजनाओं प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, ई-श्रम पोर्टल/कार्ड, श्रम कार्ड, आम आदमी बीमा योजना, सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, आयुष्मान भारत योजना के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की।
कार्यक्रम का संचालन पी एल वी अमरदीप दिवाकर ने तथा धन्यवाद ज्ञापन पी एल वी ज्योत्सना सोनकर ने दिया।
इस अवसर पर संजीवनी हॉस्पिटल के मैनेजर संजय पाल, विमल चंद्र गुप्ता (इंचार्ज संजीवनी ब्लड बैंक), हल्का लेखपाल शीलवन्त सिंह, सुरेश चन्द्र यादव, अनु, गीता, मोनू पाल, शिवानी, जागेंद्र चौधरी, पी एल वी ममता दिवाकर, ज्योत्सना सोनकर, अमरदीप दिवाकर सहित बड़ी संख्या में मरीजों के परिजन और कर्मचारी मौजूद रहे।








