कौशाम्बी: धनुष टूटने के बाद पहुंचे आक्रोशित परशुराम, लक्ष्मण के तीखे तेवर, श्रीराम की विनम्रता ने संभाला मोर्चा,रामलीला मंच पर परशुराम का रौद्र रूप और लक्ष्मण के करारे जवाब देखने लायक रहा मुकाबला,
यूपी के कौशाम्बी जिले में श्रीरामलीला कमेटी मंझनपुर की ओर से आयोजित रामलीला में मंगलवार की रात परशुराम-लक्ष्मण संवाद का जीवंत मंचन किया गया। शिव धनुष टूटने के बाद क्रोधित होकर पहुंचे भगवान परशुराम और लक्ष्मण के बीच हुए तीखे संवाद ने रामलीला मैदान में रोमांच पैदा कर दिया। वहीं भगवान श्रीराम की विनम्रता और मर्यादित व्यवहार ने प्रसंग को भावपूर्ण बना दिया।
बता दे कि मंगलवार की रात मुख्यालय में चल रहे रामलीला में परशुराम-लक्ष्मण संवाद का लीला का मंचन हुआ है। लीला में दिखाया गया कि मंच पर पहुंचे परशुराम ने क्रोध में धनुष टूटने का कारण पूछते हुए कहा कि “जिसने यह धनुष तोड़ा है, वह मेरे सामने आए।” इस पर लक्ष्मण ने निर्भीक अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि “मुनिवर! बचपन में हमने ऐसे कई धनुष देखे और तोड़े हैं, तब तो किसी ने इतना क्रोध नहीं किया।” लक्ष्मण के इस जवाब पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं। लक्ष्मण के तीखे उत्तरों से परशुराम का क्रोध बढ़ता गया। उन्होंने लक्ष्मण को अपनी शक्ति और पराक्रम का स्मरण कराया, तो लक्ष्मण ने भी व्यंग्यपूर्ण अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि “वीर पुरुष अपनी वीरता का बखान नहीं करते, उनका पराक्रम स्वयं बोलता है।” स्थिति को गंभीर होता देख भगवान श्रीराम ने अत्यंत विनम्रता से परशुराम को संबोधित किया और लक्ष्मण की ओर से क्षमा मांगते हुए कहा कि यदि उनके छोटे भाई की बातों से आपको कष्ट हुआ हो तो उन्हें क्षमा करें।
श्रीराम के शांत, सरल और मर्यादित व्यवहार ने पूरे प्रसंग को नई ऊंचाई दी। श्रीराम की विनम्रता के बावजूद लक्ष्मण के निर्भीक जवाब और परशुराम के क्रोध के बीच संवाद चलता रहा। अंततः श्रीराम की शालीनता और मर्यादा ने वातावरण को शांत किया। कलाकारों ने परशुराम के क्रोध, लक्ष्मण के तेज और श्रीराम की विनम्रता का शानदार अभिनय प्रस्तुत किया। मंचन के दौरान रामलीला मैदान दर्शकों से खचाखच भरा रहा। संवाद के दौरान कई बार तालियों की गड़गड़ाहट और ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से पूरा वातावरण गूंज उठा। दर्शकों ने कलाकारों के अभिनय की जमकर सराहना की।
इस अवसर पर कमेटी अध्यक्ष आशीष केशरवानी उर्फ बच्चाभाई, महामंत्री पंकज गामा, पंकज शर्मा, उपाध्यक्ष ज्ञानचन्द्र गुप्ता, सुशील श्रीवास्तव, रिंकू केसरवानी, संगठन मंत्री झल्लर चौरसिया, मंत्री सुनील श्रीवास्तव, कोषाध्यक्ष सोनालाल, अजय वर्मा, रोहित गुप्ता, सुशील केसरवानी, संदीप केसरवानी सहित स्थानीय नागरिकों एवं आसपास के समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।








