साइबर क्राइम थाना पुलिस ने apk file भेजकर क्रेडिट कार्ड से धोखाधडी करने वाले अंतर्जनपदीय शातिर को किया अरेस्ट

कौशाम्बी: साइबर क्राइम थाना पुलिस ने apk file भेजकर क्रेडिट कार्ड से धोखाधडी करने वाले अंतर्जनपदीय शातिर को किया अरेस्ट,

यूपी की कौशाम्बी साइबर क्राइम थाना पुलिस टीम ने एक ऐसे शातिर को अरेस्ट किया है जो लोगो के व्हाट्सएप पर apk file भेजकर उनके एकाउंट को खाली कर देता था,पुलिस टीम ने शातिर युवक को कानपुर से अरेस्ट किया हैं।

मामला 21जनवरी का है जब कड़ा धाम थाना क्षेत्र के दारानगर निवासी प्रसिद्ध मिश्रा पुत्र कृष्णधर मिश्रा ने साइबर क्राइम थाना पुलिस को सूचना दी थी कि उसके पास एक apk file आयी जिससे उनके क्रेडिट कार्ड से कुल 52600 /- रु0 ऑनलाइन धनराशि को ट्रांसफर हो गया है।सायबर क्राइम पुलिस ने इस मामले में मामला दर्ज किया था।

जिस पर एसपी सत्यनारायण प्रजापत ने साइबर क्राइम थाना/जनपदीय साइबर क्राइम सेल टीम को घटना के सफल अनावरण एवं अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु निर्देशित किया था। जिसमें मंगलवार को साइबर क्राइम पुलिस टीम ने कानपुर में संचालित साइबर क्राइम हॉट स्पॉट के 01 सक्रिय साइबर आपराधी को कानपुर से अरेस्ट कर लिया।

उपरोक्त क्रम में साइबर क्राइम थाना पुलिस टीम ने तकनीकी संसाधनों व इलेक्ट्रानिक अभिलेखों के आधार पर मुकदमा उपरोक्त से सम्बन्धित अभियुक्त विनय कुमार वर्मा पुत्र राजेन्द्र वर्मा निवासी 117/के/91 गीता नगर गजोधर का पुरवा नवीन नगर थाना काकादेव जनपद कानुपर नगर को अरेस्ट किया है।

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसके द्वारा अपने साथी के साथ मिलकर विभिन्न सरकारी/प्राइवेट बैंकिंग संस्थानों में चलने वाली योजना के नाम पर प्रयोग होने वाले एप्लीकेशन के नाम से कई लोगो को व्हाट्सएप पर ग्रुप में फर्जी apk file भेजता था, जिससे लोगो का फोन हैक होकर सारा एक्सेस हम लोगो के पास आ जाता था, जिससे हम लोग क्रेडिट कार्ड की जानकारी, CVV नंबर, OTP एवं अन्य बैंकिंग विवरण पता कर लेते थे एवं हम लोग क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने, सस्ते दामों में सामान उपलब्ध कराने, ऑनलाइन कमाई, आकर्षक ऑफर एवं भारी डिस्काउंट का लालच देकर अपने जाल में फंसाते थे। गिरोह के सदस्य तकनीकी जानकारी का उपयोग कर फर्जी ई-कॉमर्स वेबसाइट तैयार करते थे। ये वेबसाइट स्थानीय ब्रांड, ज्वेलरी, कपड़ा एवं अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठानों के नाम से बनाई जाती थीं ताकि लोगों को संदेह न हो। इन वेबसाइटों में PayU, Cashfree, NoBroker आदि पेमेंट गेटवे के लिंक जोड़े जाते थे। इसके बाद अभियुक्त चोरी की गई बैंकिंग जानकारी का उपयोग कर पीड़ितों के क्रेडिट कार्ड से धनराशि डिजिटल वॉलेट में जोड़ते थे । तत्पश्चात उक्त धनराशि पहले से लालच देकर एकत्र किए गए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी।

पुलिस टीम ने शातिर आरोपी के खिलाफ लिखापढ़ी कर उसको न्यायालय पेश किया जहा से उसे जेल भेज दिया गया।

Ashok Kesarwani- Editor
Author: Ashok Kesarwani- Editor