चरवा को नगर पंचायत नही बनवाना चाहते ग्रामीण,ADM को सौपा ज्ञापन

कौशाम्बी

चरवा गांव को शासन नगर पंचायत का दर्जा देना चाहता है, लेकिन उसके बाद लगने वाले शुल्क से गांव के चिंतित हैं। ग्रामीण नहीं चाहते कि ग्राम पंचायत को नगर पंचायत का दर्जा दिया जाए। गुरुवार को ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। एडीएम मनोज कुमार को 14 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। 27 मजरे वाले चरवा को नगर पंचायत का दर्जा दिए जाने का प्रयास चल रहा है। प्रक्रिया के बीच में ही गांव के लोगों ने इसका विरोध कर दिया। गुरुवार को गांव के रामसरन, सतीश कुमार वर्मा, जगनारायण, डीएन चौधरी, भरतलाल, बुलबुल, सुनील कुमार, कुलदीप कुमार, रवि प्रकाश, अनिल कुमार, खेतई, राम सुमेर, काशीराम, राजू समेत करीब 100 लोगों से अधिक का हस्ताक्षर युक्त पत्र ग्रामीणों ने एडीएम मनोज कुमार को सौंपा है। आंकड़ों के मुताबिक गांव की करीब 90 फीसद आबादी गरीब है। वह मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करते है। यहां किसी भी तरह को नगरीय माहौल नहीं है। यहां का मुख्य रोजगार कृषि और मजदूरी है। यह गांव नगर पंचायत बनने के मानक भी नहीं पूरा करता। नगर पंचायत बनने पर विकास तो होगा लेकिन ग्रामीण को सुविधा का शुल्क देना होगा। पूर्व में भी गजट प्रकाशित होने पर गांव के लोगों ने विरोध किया था। बताया कि ग्राम पंचायत में नौ हजार से अधिक जॉबकार्ड धारक मजदूर हैं। इनमें तीन हजार 677 परिवार बीपीएल हैं। जबकि 912 परिवार इससे भी नीचे की श्रेणी में आते हैं। चरवा के सभी 27 मजरों का लगभग यही हाल है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यहां पर भूमाफिया हावी हैं। ऐसे में चकबंदी कराकर अनाधिकृत कब्जे को हटाते हुए गांव का विकास किया जाए। ग्रामीणों ने अपनी मांगों को ज्ञापन देकर अपर जिलाधिकारी से इसको लेकर सार्थक पहल की बात कही है।

Ashok Kesarwani- Editor
Author: Ashok Kesarwani- Editor