कौशाम्बी में TET अनिवार्यता के विरोध में टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने किया प्रदर्शन,डीएम को सौंपा ज्ञापन

कौशाम्बी: कौशाम्बी में TET अनिवार्यता के विरोध में टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने किया प्रदर्शन,डीएम को सौंपा ज्ञापन,

यूपी के कौशाम्बी जिले में TET अधिसूचना से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर TET की अनिवार्यता के विरोध में टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन के क्रम में प्राथमिक शिक्षक संघ कौशाम्बी के नेतृत्व में विभिन्न शिक्षक संगठनों ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री भारत सरकार को संबोधित एक ज्ञापन डीएम डॉ अमित पाल को सौंपा।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष और टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ दिनेश चन्द्र शर्मा के नेतृत्व में शिक्षकों ने उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जिला मुख्यालय पर TET अनिवार्यता के विरोध प्रदर्शन कर डीएम के माध्यम से प्रधानमंत्री भारत सरकार को संबोधित ज्ञापन सौंपा। उसी के क्रम में कौशाम्बी के प्राथमिक शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष अनिल सिंह के नेतृत्व में जूनियर शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राकेश सिंह और राम प्रताप लाली, एससी एसटी बेसिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष रामनरेश चौधरी सहित विभिन्न शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी और शिक्षकों ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय के सामने विशाल धरना प्रदर्शन किया और पैदल मार्च कर नारेबाजी करते हुए जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर डीएम को ज्ञापन सौंपा।

प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अनिल सिंह ने बताया कि 01 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा उत्तर प्रदेश में 29 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर थोपा गया TET का आदेश पूर्णतः असंवैधानिक, नियम-विरुद्ध एवं अन्यायपूर्ण है। यह पूर्वव्यापी व्यवस्था पूरे शिक्षा जगत समेत बर्बाद कर देगी। TET अधिसूचना पूर्व नियुक्त शिक्षकों की TET अनिवार्यता का ये काला कानून शिक्षक के साथ अन्याय है। ये संविधान निहित समानता और जीवन यापन के कानून का उल्लंघन है। जब नियुक्ति के समय शिक्षक तत्कालीन न्यूनतम अर्हता को पूर्ण कर नियुक्त हुआ है तो उस पर अब नई अर्हता जबरिया क्यों थोपी जा रही है? ये तो बिल्कुल न्यायसंगत और विधिसम्मत नहीं है। परन्तु इस महत्वपूर्ण और गंभीर प्रकरण पर सरकार की चुप्पी शिक्षकों के प्रति सरकार सोच और मानसिकता को दर्शाती है। वर्तमान सरकार की भारत को जगतगुरू बनाने की मुहिम पर यह कानून कुठाराघात है जिस समाज या राज्य में शिक्षक का सम्मान नहीं है उस समाज और राज्य का उत्थान कदापि संभव ही नहीं है। इतिहास रहा है जब जब शिक्षकों ने चाहा है तब तब युग परिवर्तन हुआ है।

जूनियर शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राकेश सिंह ने बताया कि नियुक्ति के समय न्यूनतम अर्हता पूरी करके ही शिक्षक भर्ती हुआ है। अब 20 साल की सेवा के बाद कोई कहे की फिर से पात्रता परीक्षा दीजिए तो यह किसी भी प्रकार से न्याय संगत नहीं है। यदि 20 साल की सेवा के बाद किसी न्यायाधीश से कहिए कि वह पुनः न्यायाधीश होने की परीक्षा उत्तीर्ण करें तो बहुत संभावना है कि वह परीक्षा पास नहीं कर पायेंगे। जिलाध्यक्ष राम प्रताप लाली ने कहा कि TET का काला कानून थोप कर शिक्षकों पर अनावश्यक मानसिक दबाव डाला जा रहा है इस दबाव के कारण कई सारे शिक्षक काल के गाल में समा गए हैं।

प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलामंत्री रामबाबू दिवाकर ने कहा है कि हम भारत सरकार से मांग करते हैं कि आवश्यक संशोधन विधेयक लाकर टेट कानून में संशोधन कर टेट अनिवार्यता से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त रखा जाय। यदि सरकार हमारी यह मांग नहीं मानती है तो टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले मार्च के तीसरे सप्ताह देश भर के लाखों शिक्षक दिल्ली में धरना प्रदर्शन करेंगे जिसका संपूर्ण उत्तरदायित्व भारत सरकार का होगा।

इस विरोध प्रदर्शन में शिक्षक संघ पदाधिकारियों ईश्वर शरण सिंह, भोलानाथ चौधरी, विनय सिंह, अशोक द्विवेदी, आलोक सोनी, गुणेश त्रिपाठी, दिनेश जायसवाल, विनोद सिंह, अफरोज आलम, अरुण गोविल सिंह, रत्नेश यादव, विनीत सिंह, केशव प्रसाद, अतमम अली, रहमत अली, भीम प्रकाश, अनुराग, विनीत सिंह सहित जनपद के हजारों शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।

Ashok Kesarwani- Editor
Author: Ashok Kesarwani- Editor