डायट सभागार में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर आयोजित,बाल हितैषी कानूनी सेवाएं, पॉक्सो एवं संवैधानिक प्रावधानों की दी गई जानकारी

कौशाम्बी: डायट सभागार में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर आयोजित,बाल हितैषी कानूनी सेवाएं, पॉक्सो एवं संवैधानिक प्रावधानों की दी गई जानकारी,

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कौशाम्बी के तत्वावधान में सोमवार को जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), मंझनपुर, कौशाम्बी के सभागार में “बालिका सुरक्षा एवं संरक्षा” विषय पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य प्रशिक्षण में भाग ले रहे शिक्षकों को बालिकाओं के खिलाफ हिंसा, शोषण, लैंगिक अपराध एवं अन्य प्रकार के उत्पीड़न से संरक्षण प्रदान करने के साथ-साथ बच्चों के कानूनी अधिकारों के बारे में जागरूक करना रहा।

प्रशिक्षण शिविर में पीएलवी ममता दिवाकर, डॉ. नरेन्द्र दिवाकर तथा चीफ लीगल एड डिफेंस कौंसिल अमित कुमार मिश्रा ने प्रतिभागियों को बालिकाओं की सुरक्षा एवं संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी।

वक्ताओं ने नालसा की “बाल हितैषी कानूनी सेवाएं योजना, 2024” के उद्देश्यों एवं प्रावधानों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रत्येक बच्चे को न्याय तक समान एवं सुगम पहुंच सुनिश्चित करना विधिक सेवा व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने बाल पीड़ितों के साथ संवेदनशील एवं बाल-मित्र व्यवहार अपनाने तथा उन्हें निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी।

प्रशिक्षण के दौरान यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) के प्रमुख प्रावधानों पर विशेष चर्चा की गई। प्रतिभागियों को लैंगिक अपराधों की पहचान, बालिकाओं की सुरक्षा, शिकायत एवं रिपोर्टिंग की प्रक्रिया, पीड़ित बालिका की गोपनीयता तथा अपराध की गंभीरता के अनुरूप निर्धारित दंडात्मक प्रावधानों के बारे में अवगत कराया गया।

इसके साथ ही भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध अपराधों से संबंधित प्रावधानों तथा भारतीय संविधान में बच्चों एवं महिलाओं को प्राप्त मौलिक अधिकारों, समानता, गरिमा, जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता तथा संरक्षण संबंधी संवैधानिक प्रावधानों की जानकारी दी गई।

वक्ताओं ने कहा कि बालिका की सुरक्षा केवल परिवार या विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। बालिकाओं के प्रति किसी भी प्रकार के अपराध, शोषण अथवा उत्पीड़न की स्थिति में चुप रहने के बजाय समय पर उचित प्राधिकारी को सूचना देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कानून की जानकारी और जागरूकता ही बालिकाओं को सुरक्षित वातावरण प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

शिविर में प्रतिभागियों को बालिकाओं के अधिकारों, कानूनी सहायता प्राप्त करने के माध्यमों तथा आवश्यकता पड़ने पर विधिक सेवा प्राधिकरण या अधिकार मित्र से संपर्क करने की प्रक्रिया के संबंध में भी जानकारी दी गई।

कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा कि “बालिका की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा की रक्षा समाज की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल होनी चाहिए।” क्योंकि आज के बच्चे ही आने वाले समय में देश के भविष्य निर्माता होंगे। जागरूकता, संवेदनशीलता और प्रभावी कानूनी सहायता के माध्यम से बालिकाओं के लिए सुरक्षित एवं न्यायपूर्ण वातावरण का निर्माण किया जा सकता है।

प्रतिभागियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, पैनल लायर्स, लीगल एड डिफेंस काउंसिल, मध्यस्थ, महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबर्स 15100 (नालसा), 1076 (मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर), 1098 (चाइल्ड लाइन), 1091 महिला हेल्पलाइन नंबर आदि के बारे में जानकारी प्रदान की गई।

कार्यक्रम में डायट प्रवक्ता डॉ. अनामिका सिंह, शबनम सिद्दीकी, धीरज कुमार, डॉ. संदीप तिवारी, सबीह मुस्तफा सहित बड़ी संख्या में प्रतिभागी उपस्थित रहे।

Ashok Kesarwani- Editor
Author: Ashok Kesarwani- Editor